
अंग्रेजी सेना से लोहा लेने वाली महान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम सुनते ही लोग गर्व महसूस करने लगते हैं। एक समय किला खाली करके जिस महल में उन्होंने आश्रय लिया था अब वह इमारत कमजोर हो चुकी है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत महल का सुंदरीकरण करवाया जाना था। लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से इसकी इजाजत नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका।
महाराज की मौत के बाद रानी रहने आईं
मराठी शैली की यादें समेटे जनपद के शहर मुख्यालय के भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित रानी महल महारानी लक्ष्मीबाई का प्रमुख आश्रय स्थल रह चुका है। महाराज गंगाधर राव की मौत के बाद से महारानी लक्ष्मीबाई इसी रानी महल में रहने आई थीं। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेने की पूरी प्लानिंग इसी महल में रहकर की थी।
कमजोर हो चुका महल
ये धरोहर प्राचीन चित्रकला एवं पेंटिंग की जीती जागती गवाह है। दीवारों पर बहुत खूबसूरत नक्काशी है। महल के अंदर जो कमरे बने हैं उनमें सुंदर पेंटिंग की गई है। समय के साथ-साथ प्राचीन धरोहर अब कमजोर हो चुकी है। खस्ताहाल होते इस धरोहर को नगर निगम ने बचाने की पूरी कोशिश की और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 3 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया।
एक बार फिर भेजा जाएगा प्रस्ताव
काम शुरू होने से पहले एएसआई से इसकी मंजूरी मांगी गई लेकिन तकनीकी कारण बताते हुए परमिशन नहीं दी गई। इस मामले में नगर आयुक्त पुलकित गर्ग का कहना है कि सभी कमियों को दूर करते हुए प्रस्ताव नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्द भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को भेजा जाएगा।
Published on:
01 Mar 2023 09:28 pm
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