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World breast feeding week: शिशु को इसलिए जरूरी है मां का दूध, इसमें हैं ये खूबियां

मां का दूध शिशु के व्यापक विकास, मानसिक विकास, डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से बचाने में सबसे ज्यादा कारगर है।

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World breast feeding week- benefits of breast feeding

World breast feeding week: शिशु को इसलिए जरूरी है मां का दूध, इसमें हैं ये खूबियां

World breast feeding week: शिशु को इसलिए जरूरी है मां का दूध, इसमें हैं ये खूबियां

झांसी। हर बार की तरह इस बार भी 'विश्व स्तनपान सप्ताह' (World breast feeding week)अगस्त के पहले सप्ताह में मनाया जाएगा। झांसी सहित पूरे विश्व में एक अगस्त से 7 अगस्त तक चलने वाले इस सात दिवसीय अभियान के दौरान यह संदेश दिया जाता है कि जन्म के बाद स्तनपान बच्चे का मौलिक अधिकार है। जो उसे जरूर देना चाहिए। साथ ही स्तनपान मां की बेहतर सेहत के लिए भी जरूरी है। इस दौरान बताया जाता है कि शिशु के लिए मां का दूध क्यों जरूरी है? इसके लिए स्तनपान की खूबियां भी गिनाई जाती हैं।

ये है इस बार की थीम

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने स्तनपान सप्ताह मनाने के लिए गतिविधियां और दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस वर्ष स्तनपान सप्ताह की थीम– “बेहतर आज और कल के लिए, माता-पिता को जागरूक करें, स्तनपान को बढ़ावा दें” है। इस वर्ष की थीम इस बात पर जोर देती है कि स्तनपान के लक्ष्यों के प्रति के माता-पिता दोनों का सहयोग और सशक्तिकरण किया जाना अनिवार्य है।

इसलिए जरूरी है स्तनपान

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा एन के जैन ने बताया कि मां का दूध शिशु के व्यापक विकास, मानसिक विकास, डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से बचाने में सबसे ज्यादा कारगर है। जिन बच्चों को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपात कराया जाता है, उन बच्चों में मृत्यु की संभावना 33 प्रतिशत कम होती है। 6 माह की उम्र तक स्तनपान कराने से बच्चों में निमोनिया और दस्त रोग जैसे खतरों की संभावना में भी कमी आती है। इसलिए जरूरी है कि जन्म के एक घंटे के अंदर ही बच्चे को मां का दूध पिलाया जाये और बच्चे को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराया जाए।


इस दौरान बताया गया कि भारत सरकार ने 2016 में स्तनपान और ऊपरी आहार को बढ़ावा देने के लिए 'मां' कार्यक्रम की शुरूआत की थी। मां का अभिप्राय “मां का असीम आशीर्वाद है।”इस कार्यक्रम का नारा “स्तनपान विकल्प नहीं संकल्प'' है।

ये हैं आंकड़े

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर 25.2 प्रतिशत है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 फीसदी है। झांसी में एक गंटे के अंदर स्तनपान की दर 35.1 प्रतिशत है। छह माह तक स्तनपान की दर 52.2 प्रतिशत है।

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