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देश का पहला सैन्य शक्ति स्मारक शुरू होने से पहले दुर्दशा का शिकार

शौर्य उद्यान आज इस कदर दुर्दशा का शिकार है कि उसे देखकर हर कोई बोलने से नहीं हिचकेगा कि यह क्या स्थिति बनी हुई है। कपड़े में ढकी शहीद की प्रतिमाएं, प्रतिमाओं पर लगे शीशे टूट चुके हैं। भवन के अंदर फैली गंदगी और भवन के बाहर खड़े झाड़-झंखाड़ इस बाद की गवाही दे रहे हैं कि भवन की दो एग्जीबिशन गैलरी और एक प्लाजा ऑफ फ्रीडम की स्थिति देखने लायक नहीं हैं।

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झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक में सैनिक प्रतिमा पर जमी मिट्टी।

झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक में कपड़े से ढकी शहीद की प्रतिमा।

झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक शहीद प्रतिमा पर लगाया गया शीशा टूटा हुआ।

झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक पर सैनिकों की प्रतिमाओं पर जमी मिट्टी।

झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक शहीद प्रतिमा पर लगाया गया शीशा टूटा हुआ।

झुंझुनूं. दोरासर गांव स्थित सैन्य शक्ति स्मारक में लगी 1971 में हुए भारत -पाक युद्ध के दौरान आत्म समर्पण का ऐतिहासिक पल।

झुंझुनूं. दोरासर स्थित सैन्य शक्ति स्मारक के भवन परिसर गंदगी से अटा हुआ।