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लावारिश शवों का सहारा बना एंबुलेंस मैन आर्यन

पढ़ाई के बाद उसने नौकरी के प्रयास किए, लेकिन नौकरी नहीं मिली तो खुद की एंबुलेंस खरीद ली। वह जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल के बाहर एंबुलेंस खड़ी करता है। वर्ष 2011 में सेवा कार्य करने की ठानी और यह निर्णय लिया कि किसी भी लावारिश शव को लाने ले जाने का शुल्क नहीं लेगा।
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लावारिश शवों का सहारा बना एंबुलेंस मैन आर्यन

लावारिश शवों का सहारा बना एंबुलेंस मैन आर्यन

Aryan became the support of unclaimed dead bodies : दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर लावारिश के शव को अस्पताल या श्मशान घाट तक ले जाने के लिए एंबुलेंस मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जिन शवों का कोई नहीं होता, उनकी मदद कर रहा है रामपुरा गांव का आर्यन नायक। आर्यन ने बताया कि पढ़ाई के बाद उसने नौकरी के प्रयास किए, लेकिन नौकरी नहीं मिली तो खुद की एंबुलेंस खरीद ली। वह जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल के बाहर एंबुलेंस खड़ी करता है। उसने बताया कि वर्ष 2011 में सेवा कार्य करने की ठानी और यह निर्णय लिया कि किसी भी लावारिश शव को लाने ले जाने का शुल्क नहीं लेगा। तब से वह लावारिश शवों को बिना शुल्क लिए अस्पताल की मोर्चरी या फिर श्मशान भूमि तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

अब तक दो दर्जन शव ला चुके

आर्यन ने बताया कि अब तक व दो दर्जन लावारिश शवों को ला चुका है। चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पुलिस या आमजन कोई भी उसे लावारिश शव की सूचना देता है तो वह तुरंत मौके पर पहुंच जाता है। पहले मोर्चरी और फिर पहचान नहीं होने पर श्मशान भूमि तक लेकर जाता है।

तय कर रखा है दायरा

आर्यन ने शव को लाने के लिए एक दायरा निर्धारित कर रखा है। वह 25 किलोमीटर के दायरे में जो भी लावारिश शव होता है, उसे सूचना मिलने पर ले आता है। आर्यन ने बताया कि कई बार बीमार व्यक्तियों के परिजन आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उनके पास पूरा पैसा नहीं होता तो वह उनसे कम पैसा लेकर भी मरीज को अस्पताल पहुंचा देता है।

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