झुंझुनू

डीएपी किल्लत: सरकारी तंत्र नाकाम, डीलर कूट रहे चांदी

DAP shortage#कई दिनों से जिलेभर में डीएपी की किल्लत चल रही और बुआई का समय निकला जा रहा है। यहां तक कि सरसों की बुआई का समय तो 31 अक्टूबर तक बीत चुका है। जिले में अभी तक खाद नहीं मिलने से बुआई ना के बराबर हुई है। डीएपी किल्लत के मुददे पर प्रशासन ने किसानों को विकल्प के तौर पर एसएसपी उपलब्ध कराने का दावा किया था। परंतु वर्तमान में स्थिति को देखा जाए तो डीएपी और एसएसपी उपलब्ध कराने में संबंधित विभाग नाकाम साबित हो रहा है।

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डीएपी किल्लत: सरकारी तंत्र नाकाम, डीलर कूट रहे चांदी

जितेन्द्र योगी@झुंझुनूं. प्रशासनिक उदासीनता का खमियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर डीएपी और एसएसपी खाद मुहैया कराने में सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। कई दिनों से जिलेभर में डीएपी की किल्लत चल रही और बुआई का समय निकला जा रहा है। यहां तक कि सरसों की बुआई का समय तो 31 अक्टूबर तक बीत चुका है। जिले में अभी तक खाद नहीं मिलने से बुआई ना के बराबर हुई है। डीएपी किल्लत के मुददे पर प्रशासन ने किसानों को विकल्प के तौर पर एसएसपी उपलब्ध कराने का दावा किया था। परंतु वर्तमान में स्थिति को देखा जाए तो डीएपी और एसएसपी उपलब्ध कराने में संबंधित विभाग नाकाम साबित हो रहा है। फिलहाल जिले की सभी सहकारी समितियों में डीएपी और एसएसपी का एक दाना नहीं है।

मनमर्जी दरें वसूलने के आरोप
किसानों को डीएपी और एसएसपी उपलब्ध कराने में सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। जबकि जिले के निजी डीलर डीएपी समेत अन्य उर्वरक मनमर्जी दरों पर बेचकर चांदी कूट रहे हैं। सहकारी समितियों में डीएपी व एसएसपी नहीं मिलने के पीछे किसान यह भी आरोप लगा रहे हैं कि निजी डीलरों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

400 से अधिक लाइसेंसधारी निजी डीलर
कृषि अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में जिले में 400 के करीब लाइसेंसधारी निजी डीलर हैं। इसके अलावा अगर सरकारी तंत्र में खाद मिलने की बात की जाए तो छह क्रय-विक्रय सहकारी समिति और करीब 30-40 ग्राम सेवा सहकारी समितियां हैं जो जिले में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

जिले में रबी फसल बुआई का लक्ष्य (है.)

चना 75000

सरसों 72000

गेहूं 70000

जौ 10000

किसान : 05 लाख से अधिक

फसल बुआई के लिए डीएपी खाद की जरूरत है। मगर बाजार के चक्कर लगाने के बाद भी नहीं मिल रही है। कुछ दुकानदार डीएपी की तय दर से 500 रुपए ज्यादा ले रहे हैं। सरकार को खाद उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।


विनोद रावत, किसान बुडानिया

एक तरफ कहा जा रहा है कि खाद उपलब्ध नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ कुछ डीलर महंगे दामों पर डीएपी बेच रहे हैं। किसानों का शोषण तो हो ही रहा है, फसल बुआई में देरी हो रही है।
सुशील डांगी, किसान श्योपुरा

क्या कहते हैं जिम्मेदार....
जल्द ही एसएसपी आने वाली है। 50 टन का ऑर्डर दिया हुआ है। सोमवार को एक हजार बैग आएंगे। निजी डीलरों के पास डीएपी उपलब्ध है। तय दर से ज्यादा वसूलने वाले डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डा. राजेंद्र लांबा, उप निदेशक कृषि विस्तार (झुंझुनूं)

फिलहाल डीएपी उपलब्ध नहीं है। इसके लिए डिमांड भेजी है। कलक्टर को भी अवगत करा रखा है।
सुमन चाहर, एमडी सीसीबी, झुंझुनूं

खेतड़ी जीएसएस में एसएसपी उपलब्ध है। अन्य क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में नहीं है। दिवाली के चलते नहीं आ पाई।
संदीप शर्मा, डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (झुंझुनूं)

Published on:
08 Nov 2021 11:50 am
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