
झुंझुनूं जिले के पोषाणा गांव में बना शहीद स्मारक, जहां छह शहीदों की लगी है प्रतिमा। फोटो पत्रिका
Army Day Special : झुंझुनूं के जांबाजों ने करगिल की बर्फीली चोटियों से लेकर सरहदों की तपती रेत तक, हर मोर्चे पर दुश्मन के हौसले पस्त किए हैं। यहां के जवानों ने कभी जान की परवाह नहीं की-बस तिरंगे की आन-बान-शान सर्वोपरि रही। यही कारण है कि अब तक जिले के 485 जवान शहादत दे चुके हैं और 81 से अधिक सैनिकों को वीरता पुरस्कार मिल चुके हैं।
कीर्ति चक्र : 04
वीर चक्र : 23
शौर्य चक्र : 10
सेना मेडल : 23
नौसेना मेडल : 02
मेंशन इन डिस्पैच : 14
भारत-पाक 1971 का युद्ध महज 13 दिन चला, लेकिन इसमें देश के 3900 जवान शहीद हुए। शेखावाटी ने इसमें 168 वीर दिए। जिसमें झुंझुनूं के 108, सीकर के 46 और चूरू के 12 जवान शामिल थे।
जिले में आज 65 हजार पूर्व सैनिक और 55 हजार वर्तमान सैनिक हैं। यानी झुंझुनूं का शायद ही कोई गांव ऐसा हो, जहां फौज से नाता न हो। परमवीर चक्र विजेता हवलदार मेजर पीरू सिंह (मरणोपरांत) इस धरती की सबसे ऊंची पहचान हैं। वहीं लेफ्टिनेंट कुंदनसिंह, 9 सेनाध्यक्ष एडमिरल विजयसिंह शेखावत, ब्रिगेडियर आरएस श्योरान जैसे नाम इस जिले की सैन्य परंपरा को नई ऊंचाई देते हैं।
25 हजार युवा तीनों सेनाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं। 24 से अधिक डिफेंस एकेडमियां जिले में संचालित हैं। शहीदों के बच्चों के लिए ‘सांझी छत’ हॉस्टल, सैनिक विश्राम गृह, ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और चिड़ावा, गुढ़ागौड़जी और झुंझुनूं में कैंटीन संचालित है।
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Updated on:
15 Jan 2026 10:51 am
Published on:
15 Jan 2026 10:48 am
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