
झुंझुनूं. देरवाला में निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर नगरपरिषद प्रशासन व देरवाला ग्रामीणों के बीच चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए सभापति सुदेश अहलावत के कक्ष में हुई वार्ता विफल हो गई। एक व्यक्ति का बिना इजाजत के बोलना देरवाला पहाड़ी संघर्ष समिति व ग्रामीणों को अखरा। अध्यक्ष दिनेश सुण्डा ने बिना इजाजत बोलने पर सभापति, कलक्टर व एसपी की मौजूदगी में तीन-चार बार मेज को जोर से थपथपाते हुए विरोध जताया। बाद में ग्रामीण के साथ बैठक का बॉयकाट कर बाहर चले गए। बात संभालने के लिए कलक्टर दिनेश कुमार यादव व एसपी मनीष अग्रवाल ने व्यक्ति का बैठक से कोई सरोकार नहीं होने की बात कहते हुए फिर से वार्ता के लिए कहा। लेकिन ग्रामीणों ने इंकार कर दिया।
देरवाला में बढ़ जाएंगे मरीज
संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश सुण्डा ने बताया कि गांव देरवाला टीबी प्रभावित गांव में शामिल है। प्लांट लगने से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि प्लांट लगने से पहले परिषद प्रशासन ने पंचायत व ग्रामीणों की राय नहीं ली
वार्ता की शर्तों का उल्लंघन
प्रशासन की ओर से सभापति, कलक्टर व एसपीवार्ता में शामिल हुए।ग्रामीणों ने अपना पक्ष रखने के लिए दिनेश सुण्डा को अधिकृत किया था। वार्ता शुरू होने से पहले बिना इजाजत नहीं बोलने को लेकर दोनों पक्षों में निर्णय हुआ। इधर, वार्ता लगभग अंतिम दौर पर थी इस दौरान एक व्यक्ति के बोलने से समिति के पदाधिकारी उठकर चले गए।
मुझे आपसे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं
वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर सभापति अहलावत व जिला परिषद सदस्य के बीच शब्द युद्ध चला।सभापति ने खुले मंचों पर बोर्ड के बारे में बयानबाजी का विरोध जताते हुए सुण्डा से कहा कि परिषद प्रशासन को अच्छे या बुरे काम के लिए आपके सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं है।वार्ता में देरवाला सरपंच रेखा, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष विमला बेनीवाल के अलावा आयुक्त विनयपाल सहित ग्रामीण आदि शामिल हुए।
सीएम के सामने करेंगे विरोध
इधर, बनती-बनती बात बिगडऩे व मुख्यमंत्री के दौरे को मात्र एक दिन का समय शेष रहने व ग्रामीणों के यात्रा के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा प्रशासन व पुलिस को परेशानी में डाल दिया। विरोध किस तरह व कहां होगा इसके पत्ते ग्रामीणों ने अभी तक नहीं खोले हैं।
परिषद चाहती है हल- सभापति
& वार्ता के दौरान गांव का ही सुझाव रखने के लिए एक व्यक्ति बोलने के लिए खड़ा हुआ था, लेकिन राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले को यह सुझाव पसंद नहीं आया। परिषद व ग्रामीण अभी भी इसका हल चाहते हैं, वार्ता के जरिए समाधान के लिए हमेशा तैयार थे और आगे भी रहेंगे। लेकिन कुछ लोग ग्रामीणों को भ्रमित कर रहे हैं। वे विकास नहीं चाहते ना ही उनका उस ग्राम पंचायत से कोई लेना देना है।
सुदेश अहलावत, सभापति नगरपरिषद
Published on:
29 Nov 2017 04:18 pm

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