issue of the Yamuna canal water : झुंझुनूं में सिंचाई के लिए यमुना नहर लाने के मुददे पर पक्ष-विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेक रहें हैं, परंतु किसानों की इस समस्या का हल किसी ने नहीं कराया। केवल हरियाणा बोर्डर के नजदीक गांव चुड़ीना में शिलान्यास का पत्थर लगाने के अलावा कुछ नहीं हुआ। अब तो वह पत्थर भी गायब हो गया है। जिले में वर्तमान में भूजल की समस्या गंभीर है।
जितेन्द्र योगी
झुंझुनूं. issue of the Yamuna canal water : पिछले कई दशकों से झुंझुनूं में सिंचाई के लिए यमुना नहर लाने के मुददे पर पक्ष-विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेक रहें हैं, परंतु किसानों की इस समस्या का हल किसी ने नहीं कराया। केवल हरियाणा बोर्डर के नजदीक गांव चुड़ीना में शिलान्यास का पत्थर लगाने के अलावा कुछ नहीं हुआ। अब तो वह पत्थर भी गायब हो गया है। जिले में वर्तमान में भूजल की समस्या गंभीर है। भू जल स्तर सैकड़ों फीट नीचे चला गया है। कुएं सूख चुके हैं। कई गांवों में तो पीने के पानी की समस्या हो चुकी है। ऐसे में खेतों में फसलें बुवाई कर सिंचाई करना तो मुश्किल हो गया है। अगर जिले में नहर आए तो किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल जाएगा और जल स्तर भी बढ़ेगा।
1994 में हुआ था समझौता
1994 में पांच राज्यों के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों राजस्थान से भैरोंसिंह शेखावत, हरियाणा से भजनलाल, यूपी से मुलायसिंह यादव, हिमाचल प्रदेश से वीरभद्रसिंह व दिल्ली से मदनलाल खुराना ने यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते में तीन जिले झुंझुनूं, चूरू और भरतपुर को 1.19 बिलयिन क्यूबिक मीटर पानी देना तय किया गया था। इसकी पालना में 1995 में अपर यमुना रिवर बोर्ड का गठन किया गया। राजस्थान के अलावा बाकी सभी प्रदेशों से यमुना गुजरती है। इसलिए बाकी राज्यों को पानी समझौते के अनुसार मिलने लगा। परंतु झुंझुनूं और चूरू को हरियाणा की अनापत्ति के बगैर पानी मिलना सम्भव नहीं था। सन 2001 में हरियाणा के मुख्यमंत्री और राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में हरियाणा के अधिकारियों ने उसी समय स्पष्ट कर दिया था कि राजस्थान को हरियाणा की नहरों से पानी नहीं दिया जा सकेगा। चूंकि झुंझुनूं और चूरू जिले में पानी हरियाणा की नहर से ही आ सकता था। इसलिए राजस्थान सरकार ने हरियाणा में लोहारू तक बनी नहर को इस कार्य के लिए लेने तथा हरियाणा में नहरों के निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी राजस्थान द्वारा लेने सम्बन्धी एमओयू का प्रारूप हरियाणा को 14 फरवरी 2003 को भिजवाया गया। हरियाणा ने इस समझौते पर हरियाणा के हितों की अनदेखी होने का कारण बता हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस मुद्दे को हरियाणा राज्य ने अपर यमुना रिव्यू कमेटी में ले लिया। कमेटी की 12 अप्रेल 2006 को हुई बैठक में चार राज्यों के अधिकारियों की एम्पावर्ड कमेटी बनाने का निर्णय किया गया और फिर कमेटी ने 29 दिसंबर 2007 को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए निर्णय किया कि समझौते में हरियाणा के हितों की अनदेखी नहीं हुई है। कमेटी ने माना कि वेस्टर्न जमुना कैनाल की ही मरम्मत कर पानी ले जाने लायक बनाया जा सकता है। मरम्मत और नए निर्माण का जो भी खर्च आएगा वो राजस्थान देने को तैयार है। मगर हरियाणा इनमें से किसी भी उपाय पर राज़ी नहीं हुआ।
समझौता शेखावाटी के भविष्य से जुड़ा मुददा
यमुना जल समझौता शेखावाटी के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। झुंझुनूं जिला गम्भीर जल संकट से जूझ रहा है और आगे आने वाले समय में स्थिति और भी विकट होने वाली है। इलाके की जल समस्या से निजात की एकमात्र आस यमुना जल समझौता है। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर के अनुसार यमुना का पानी आने के बाद, क्षेत्र की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हमारी मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर सुलझाएं।
यशवर्धन सिंह शेखावत याचिकाकर्ता, राजस्थान हाइकोर्ट व संयोजक यमुना जल संघर्ष समिति