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जानें कौन थे 7 बार के विधायक सुंदर लाल,  जिनको विपक्ष भी बोलता था काका 

। शुरुआती दौर में वह ऊंट से जनसम्पर्क करने गांवों में जाते थे। संगीत के प्रेमी थे।

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राजस्थान के पूर्व मंत्री सुंदरलाल।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से सात बार विधायक व मंत्री रहे सुंदर लाल खुद ज्यादा पढ़े ​लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने कई बार रिटायर्ड आईएएस को चुनाव में हराया। वे शेखावाटी में काका नाम से जाने जाते थे। पक्ष ही नहीं ब​ल्कि विपक्ष के सदस्य भी उनको काका नाम से सम्बो​​धित करते थे। काका उनका एक तरह से सरनेम बन गया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुन्दरलाल का तेरह सितम्बर 2024 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनका जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उपचार चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार झुंझुनूं जिले के पैतृक गांव कलवा में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच किया गया।खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तरफ से भेजा गया शोक संदेश पढ़ा। उनके ज्येष्ठ पुत्र बृजेन्द्र कुमार ने मुखाग्नि दी।

दोनों पार्टियों से रहे विधायक

सुंदरलाल कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों से विधायक रहे। उन्होंने कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाई। वह 1989 संसदीय सचिव राज्य मंत्री, 1998 मोटर गैराज एवं ऊर्जा राज्य मंत्री, 2007 में एससी आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री) और 2016 से 2018 तक एससी आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री) रहे।

कलवा गांव में जन्मे

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के कलवा में 22 अगस्त, 1933 को जन्मे सुंदरलाल के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1971 में ग्रामीण जनप्रतिनिधि के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा। वर्ष 1972 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1980 में निर्दलीय, 1985 में कांग्रेस, 1993 में निर्दलीय, 2003 में वह भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र को उन्होंने परिसीमन के बाद छोड़ दिया और 2008 व 2013 में पिलानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। काका सुन्दरलाल भले ही कम पढे लिखे थे लेकिन उन्होंने आईएएस एवं उच्च शिक्षा प्राप्त प्रत्याशियों को हराया था।

हेलीकॉप्टर से लेकर गए थे भैरोंसिंह शेखावत

वर्ष 1993 में भैरोंसिंह शेखावत की सरकार बनाने में सुन्दरलाल का अहम रोल रहा था। कांग्रेस से टिकट कटने पर सुन्दरलाल ने सूरजगढ़ से निर्दलीय चुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया। इसके बाद 6 मार्च 1995 को भैरोंसिंह शेखावत बुहाना के घरडाना में आयोजित किसान सम्मेलन कार्यक्रम में आए थे, उस वक्त वे सुन्दरलाल को हेलीकॉप्टर में बैठाकर साथ जयपुर लेकर गए और सुंदरलाल को भाजपा में शामिल किया। उस समय कांग्रेस ने भी सुन्दरलाल को वापस पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया लेकिन सुन्दरलाल ने इनकार कर दिया। उसके बाद सुन्दरलाल भाजपा में ही रहे। काका सुन्दरलाल भैरोंसिंह शेखावत के बेहद नजदीकियों में थे।

इसलिए पड़ा काका नाम

सुन्दरलाल बेबाकी और ठेठ देशी अंदाज के लिए जाने जाते थे। एक बार चंदनमल बैद से विधानसभा में कृषि मुद्दे को लेकर बहस हो गई। सुन्दरलाल को कृषि संबंधी अच्छी जानकारी थी। उनकी बात सुनकर उनके विधानसभा के साथी चंदनमल बैद्य ने कहा कि ठीक है काका...। बस उसी दिन से उनका नाम काका पड़ गया। विधानसभा में मुख्यमंत्री, मंत्री से लेकर कर्मचारी तक उन्हें काका के नाम से ही सम्बोधित करते थे। पक्ष के साथ विपक्षी भी उनको काका नाम से सम्बो​धित करते थे।

लगाते थे ठुमके, गाते थे रागिनी

दुख की घड़ी में कार्यकर्ताओं के साथ वे हमेशा खड़े मिलते थे। शुरुआती दौर में वह ऊंट से जनसम्पर्क करने गांवों में जाते थे। संगीत के प्रेमी थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अक्सर हिस्सा लेते। कार्यक्रमों में ठुमके भी लगाते थे। वह हारमोनियम, ढोलक व अन्य साज को बजाने में माहिर थे। देसी अंदाज में रागिनी थी गाते थे।कलवा गांव में साधारण परिवार में झूथाराम मेघवाल के घर में जन्मे सुन्दरलाल बात के धनी थे। अधिक पढ़ाई नहीं की लेकिन किसी बात को याद रखने की क्षमता गजब की थी। सूरजगढ़ एवं पिलानी विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश कार्यकर्ताओं के नाम, गांव एवं उनकी रिश्तेदारी तक उनके याद रहती थी।

तिकड़ी के नाम से थे मशहूर

राजनीति के शुरुआती दिनों में शीशराम ओला, प्रहलाद पुहानिया व सुन्दरलाल की जोड़ीतिकड़ी के नाम से मशहूर थी। तीनों की अपने क्षेत्र में गजब की पकड़ एवं पक्की दोस्ती रही। बाद में सुन्दरलाल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आ गए।

बच्चों को खूब पढाया

सुन्दरलाल भले ही ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए हो, लेकिन अपने परिवारजनों को बेहत्तर शिक्षा दिलाने में वह सदैव सजग दिखे। उनका एक बेटा डॉ. धर्मपाल व्याख्याता, एक बेटा विनोद शिक्षक एवं सबसे छोटे बेटे कैलाशचंद्र मेघवाल चिड़ावा पंचायत समिति के प्रधान रह चुके हैं। सबसे बड़े बेटे बिजेन्द्र, ईश्वर सिंह, पुरुषोत्तमराज अपना स्वयं का बिजनेस करते हैं। उनके छह बेटे एवं तीन बेटियां हैं।

रिटायर्ड आईएस को हराया

पिलानी सुरक्षित सीट बनने के बाद पहला चुनाव सुंदरलाल ने भाजपा के टिकट पर लड़ा। उनके सामने थे, रिटायर्ड आइएएस व राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष हनुमान प्रसाद। हनुमान प्रसाद को कांग्रेस ने टिकट दिया। कुल 15 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। चुनाव में जीत सुंदरलाल को मिली। इसके बाद वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा ने फिर सुंदरलाल को मैदान में उतारा। इस बार कांग्रेस ने लगातार हार रहे हनुमान प्रसाद का टिकट काटकर मदन लाल को अपना प्रत्याशी बनाया। चुनाव से कुछ समय पहले ही भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत हुए जेपी चंदेलिया ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस बार भी जनता ने जीत का सेहरा साक्षर सुंदरलाल के बांधा। सुंदरलाल को 50 फीसदी से ज्यादा मत मिले। दूसरे स्थान पर रिटायर्ड आइएएस जेपी चंदेलिया रहे, उनको कुल 40 फीसदी से ज्यादा मत मिले। जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी मदन लाल को मात्र 3.25 फीसदी मत मिले।

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