सके लिए वहां पर 120-120 फीट के दो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इनके ऊपर फिल्टर करने के लिए पत्थर रोड़ी व अन्य सामग्री लगाई गई है। एक सिस्टम पर सबसे ऊपर बड़े आकार के बारह छेद छोड़े गए हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं शहर की गोपाल गोशाला में अब बरसात का पानी बहकर नालों में नहीं जाएगा। बरसाती पानी को वापस जमीन में डाला जाएगा। इसके लिए वहां पर 120-120 फीट के दो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इनके ऊपर फिल्टर करने के लिए पत्थर रोड़ी व अन्य सामग्री लगाई गई है। एक सिस्टम पर सबसे ऊपर बड़े आकार के बारह छेद छोड़े गए हैं। सबसे पहले पानी बारह छेदों में जाएगा। यहां से पत्थर रोड़ी के मिक्सर में जाएगा। पानी के साथ आने वाली मिट्टी यहीं पर जमा हो जाएगी। इसके बाद पानी फिल्टर होकर 120 फीट के बोरवेल में चला जाएगा। इस बोरवेल से पानी निकाला नहीं जाएगा, बल्कि इसमें केवल पानी डाला जाएगा। कुछ सालों के बाद आस-पास के क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ेगा। साथ ही पानी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। शनिवार 7 जून 2025 को पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य विश्वम्भर पूनिया व जिला कलक्टर रामावतार मीणा ने दोनों वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का लोकार्पण किया। इसके बाद अतिथियों ने गोशाला का अवलोकन किया। इनमें गायों के स्नान हेतु लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम, निर्माणाधीन बायोगैस प्लांट एवं कबूतर खाना सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया । चौधरी ने गोवंश को गुड़, हरा चारा, हरी सब्जियां एवं गेहूं के आटे से बनी रोटियां खिलाई। उन्होंने एक बार गुड़ व अन्य सामग्री तथा दूसरी बार हरी चरी का तुलादान किया।
इस दौरान गोशाला के पदाधिकारियों ने जल उपभोग पर वाणिज्यिक दरों पर 5 गुना अधिक बिल लेने को गलत बताते हुए इससे कम या माफ करने की मांग की। गोशाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष बनवारी लाल सैनी, शुभकरण चौधरी, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ शिवरतन,डॉ भरत सिंह,कमलकांत शर्मा, इंजीनियर प्यारेलाल ढूकिया, कृष्ण गावड़िया, ताराचंद गुप्ता, प्रमोद जानू, अरुणा सिहाग, सचिव नेमी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राजकुमार तुलस्यान, आनंद टीबड़ा, विपिन राणासरिया व गणेश हलवाई चिडावा वाला सहित अनेक लोग मौजूद रहे। संचालन डी.एन.तुलस्यान ने किया ।
निजी भवनों में तो पानी बचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अधिकतर स्कूलों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम फेल हैं। कहीं पाइप टूट चुके तो कहीं उनको टैंक से नहीं जोड़ा जा रहा। कहीं टैंक व पाइप सही हैं लेकिन उनको नालों से नहीं जोड़ा जा रहा।