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साढ़े आठ घंटे बाद पकड़ में आया सांभर, फिर भी बचा नहीं पाए, देखें वीडियो…

रास्ता भटक कर एक सांभर (हिरण) नवलगढ़ पहुंच गया। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। करीब साढ़े आठ घंटे की मशक्कत के बाद सांभर को रेस्क्यू किया गया लेकिन पता चला कि सांभर की मौत हो चुकी है।
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झुंझुनू

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Yuglesh Sharma

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Updated: 8 Feb 2024, 6:52 PM IST

साढ़े आठ घंटे बाद पकड़ में आया सांभर, फिर भी बचा नहीं पाए, देखें वीडियो...

साढ़े आठ घंटे बाद पकड़ में आया सांभर, फिर भी बचा नहीं पाए, देखें वीडियो...

रास्ता भटक कर एक सांभर (हिरण) नवलगढ़ पहुंच गया। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। करीब साढ़े आठ घंटे की मशक्कत के बाद सांभर को रेस्क्यू किया गया लेकिन झुंझुनूं पहुंचने पर पता चला कि सांभर की मौत हो चुकी है। सांभर की मौत का कारण कैप्चर मायोपैथी (घबराहट) बताया जा रहा है।


शहर में सुबह 7 बजे अग्निशमन केंद्र के पास सांभर को देखा गया। नगरपालिका के सफाई निरीक्षक ललित शर्मा के नेतृत्व में अन्य कर्मचारियों ने सांभर को पकडऩे के लिए गलियों में काफी देर तक दौड़ लगाई लेकिन वह हाथ नहीं आया। सूचना पर करीब 10 बजे नवलगढ़ वन विभाग से वनपाल गिरधारीलाल सैनी, गोकुलचंद राड़ आदि पहुंचे। उन्हें भी सफलता नहीं मिली। इसके बाद झुंझुनूं से वन विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश काजला व अन्य कर्मचारी रेस्क्यू वाहन लेकर वहां पहुंचे। लेकिन ट्रेंकुलाइजर गन नहीं होने के कारण यह टीम भी काफी देर तक हिरण के पीछे दौड़ती रही।

सांभर रामदेवरा के पास पाटोदिया गली, गणेशपुरा होते हुए जयपुरिया अस्पताल में भी घुस गया। यहां भी रेस्क्यू टीम पकडऩे के लिए नजदीक तक गई वह दीवार फांदकर मोर अस्पताल रोड पर चला गया। यहां एक बकरियों के बाड़े में घुस गया। टीम ने बाड़े का दरवाजा बंद कर घेराबंदी की और सांभर की टांगे बांधी। इसके बाद उसे जाल में लपेट कर झुंझुनूं के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि झुंझुनूं पहुंचने पर टीम को पता चला कि सांभर की मौत हो चुकी है।


ट्रेंकुलाइजर गन होती तो शायद इतना समय नहीं लगता
वन विभाग में नवलगढ़, झुंझुनूं सहित अधिकारियों, कर्मचारियों की बड़ी टीम है। लेकिन एक हिरण को पकडऩे में ही साढ़े आठ घंटे लग गए। क्योंकि पूरे शेखावाटी क्षेत्र में वन विभाग के पास ट्रेंकुलाइजर गन नहीं है। ट्रेंकुलाइजर गन की समस्या अप्रेल 2023 में भी नवलगढ़ के गोठड़ा गांव स्थित सीमेंट कंपनी परिसर में तेंदुआ घुस जाने पर सामने आई थी। उस समय भी जयपुर चिडिय़ाघर से ट्रेंकुलाइजर गन मंगवाई गई। इतने में तेंदुआ भाग गया। तीसरे दिन जाकर बेरी गांव में पकड़ में आया।


यह बताया मौत का कारण

वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार सांभर, हिरण, चीतल, चिंकारा आदि जीवों को पकडऩे के लिए विशेष असामान्य परिस्थिति में ही ट्रेंकुलाइज करना चाहिए। इन जीवों में ज्यादा देर तक दौडऩे तथा भीड़भाड़ से घबरा कर कैप्चर मायोपैथी की समस्या के कारण मौके पर ही मौत भी हो सकती है।


इनका कहना है
ट्रेंकुलाइजर गन मंगवाने के लिए टेंडर किए गए थे। लेकिन गन सप्लाई करने वाली फर्म टेंडर प्रक्रिया के नियमों का पालन नहीं कर पाई इसलिए टेंडर रद्द हो गया। जल्दी ही दुबारा टेंडर करवाया जाएगा।
- बीएल नेहरा, डीएफओ, वन विभाग झुंझुनूं
नवलगढ़ में आए सांभर की रेस्क्यू टीम द्वारा पकड़ते समय ही मौत हो गई थी। सांभर, हिरण, चीतल जैसे जानवरों में ज्यादा भीड़ व काफी देर तक दौड़ते रहने से अधिक घबराहट होने के कारण कई बार मौत हो जाती है। ऐसा ही शायद नवलगढ़ में पकड़े गए सांभर के साथ हुआ। बाकी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
- सुरेंद्र शर्मा, एसीएफ, वन विभाग झुंझुनूं

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