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बच्चों की जिंदगी खराब कर रहे स्मार्ट फोन, जानिए किस उम्र में क्या सर्च करते हैं बच्चे, विशेषज्ञों ने बचाव के उपाव भी बताए

बालरोग विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक उत्पादों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव किशोरावस्था से गुजर रहे मासूमों पर पड़ता है।

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Doctors of jhunjhunu

झुंझुनूं. भाग-दौड़ भरी जिंदगी में जीवन को आसान बनाने वाले स्मार्टफोन, टैबलेट, कम्प्यूटर आदि गैजेट्स का जितना लाभ है उतने ही इसके दुष्प्रभाव भी हैं। आलम ये है कि जीवन आसान करने के चक्कर में बहुत सारी चीजें हाथ से निकलती जा रही हैं। बालरोग विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक उत्पादों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव किशोरावस्था से गुजर रहे मासूमों पर पड़ता है।

आज के दौर में स्मार्ट फोन व कम्प्यूटर की मौजूदगी सामान्य चीज हो गई है। इनके रहने से बच्चे खेेलने-कूदने के बजाय घंटों तक इसी में लगे रहते हैं। माना जाता है कि इस उम्र में बच्चों में जिज्ञासा अन्य वर्ग के लोगों से अधिक होती है। और अकेले में बच्चे स्मार्ट फोन में दुष्प्रभावी साइटों को खोलते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे अपनी कड़ी निगरानी में ही मासूमों को ये सुविधाएं दें।


साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि 14 वर्ष के बाद के बच्चे साइट पर विजिट करना शुरू करते हैं। 16 वर्ष की उम्र तक ये इन साइटों के नियमित विजिटर हो जाते हैं। यही कारण है कि साइट्स में कुल विजिट करने वालों में सबसे अधिक संख्या 22 साल से कम वालोंं की है।


आंख में शिकायत व चिड़चिड़ापन
आज के दौर में बच्चे स्मार्ट फोन लैपटॉप से चिपके रहते हैं।लगातार कई घंटों तक स्क्रीन को देखने से बच्चों की आंखें कमजोर होने लगती हैं।बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विद्याधर बाजिया का कहना है कि कम उम्र में चस्मा लगने के लिए ये बड़ा कारण है।वहीं, मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से बच्चे में चिड़चिड़ापन की भी शिकायत होती है।


खेलकूद व शारीरिक व्यायाम के लिए करें प्रेरित
माना जाता है कि बच्चे खाली समय में व मनोरंजन के लिए इन गैजेट्स का उपयोग करते हैं। बच्चों को स्क्रीन के दूर रखने के लिए खेलकूद व अन्य शारीरिक व्यायाम संबंधी गतिविधियों से जोडऩे की आवश्यक्ता है। जिसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिजनों की है। वहीं स्कूलों में खेलकूद गतिविधियां अनिवार्य करने से भी बच्चों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

&स्मार्ट फोन व कम्प्यूटर के अधिक उपयोग से बच्चों में मोटापा, नींद न लगने, आंख व कान कमजोर होने जैसी समस्या आने लगती हैं। बच्चे गलत चीजों को जल्दी पकड़ते हैं। इसलिए उनका ध्यान गलत साइटों पर अधिक जाता है।
डॉ विद्याधर बाजिया, बाल रोग विशेषज्ञ बीडीके अस्पताल झुंझुनूं

&मोबाइल व कम्प्यूटर के अधिक उपयोग से एकाग्रता व याददास्त कमजोर होने लगती है। वहीं इसके अधिक उपयोग से बच्चे परिजनों व समाज से दूर रहने लगते हैं। जिससे बच्चों में अच्छे संस्कार की भी कमी आती है। राष्ट्रीय अपराध शाखा के सर्वे के अनुसार बच्चों में अपराध में वृद्धि के लिए इंटरनेट बड़ा कारण है।
डॉ. लालचंद ढाका, मनोचिकित्सक झुंझुनूं

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