
आप जमीन में पानी का पता लगाना चाहते हो तो चले आइए राजस्थान के चिड़ावा में
सुरेंद्र डैला
चिड़ावा(झुंझुनूं) . भूजल की सटीक जानकारी देने वाला सॉफ्टवेयर उन किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें दो-तीन जगह बोरिंग करवाने के बाद भी पानी नहीं मिलता। ये सॉफ्टवेयर तैयार किया है इंजीनियर योगेन्द्रपाल राव ने, जिन्होंने दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय से बी-टेक किया है। राजस्थान में ऐसे कई जिले हैं, जहां बोरिंग के बाद पानी मिलना
निश्चित नहीं होता। घरड़ाना खुर्द हाल सिंघाना के सिविल इंजीनियर योगेंद्रपाल राव ने एक साल की मेहनत के बाद इस सॉफ्टवेयर को तैयार किया है। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर सॉफ्टवेयर से भूजल की जांच की, जिसमें 95 प्रतिशत परिणाम सफल रहे हैं। इस सॉफ्टवेयर को तैयार करने में दिल्ली के नितिन यादव ने भी उनका सहयोग किया।
ऐसे तैयार हुआ सॉफ्टवेयर
योगेंद्रपाल मशीन व सॉफ्टवेयर की मदद से भूजल की जानकारी लेते हैं। जर्मनी निर्मित इस मशीन के साथ जो सॉफ्टवेयर आता है, वह विदेशी होता है, जिसमें विदेशी भौगोलिक स्थिति के अनुसार डाटा फीड होते हैं। ऐसे में वे भारत की भूजल की सही जानकारी नहीं दे पाते। इसी को ध्यान में रखकर योगेंद्र ने यहां की स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्यो सोयल लेयर विजन (एनएसएलवी) सॉफ्टवेयर तैयार किया, जिसमें यहां के भूजल की स्थितियों के अनुसार ही डाटा फीड किए हैं।
ऐसे काम करता है सॉफ्टवेयर
सॉफ्टवेयर से भूजल के 95 प्रतिशत तक रिजल्ट सही मिलते हैं। बतौर इंजीनियर, सबसे पहले खेत के सबसे अच्छे प्वाइंट को चुना जाता है, जहां अलग-अलग डाउजिंग रॉड लगा दी जाती है। इस रॉड में करंट प्रवाहित किया जाता है। मशीन की मदद से डाटा क्लेक्ट कर लेते हैं, जिसका सॉफ्टवेयर से विश्लेषण किया जाता है। सॉफ्टवेयर से मिले डाटा के आधार पर भूजल की सटीक जानकारी मिल जाती है।
कुछ दिन पहले गांव के मोहल्ला बुडानिया में दो जगहों पर सार्वजनिक बोरवेल बनाए गए, जिसमें पानी नहीं आया। ऐसे में इस मशीन व सॉफ्टवेयर की मदद से फेल बोरवेल से कुछ दूरी पर बोरवेल के लिए भूजल जांचा गया। मशीन से मिले रिजल्ट के आधार पर ट्यूबवैल बनाया गया, जिसमें भरपूर मात्रा में पानी मिला।
संतोष देवी, सरपंच ग्राम पंचायत बुडानिया(चिड़ावा)
18 00 फीट तक पानी की जानकारी
सॉफ्टवेयर से भूजल में पानी की गहराई, मात्रा, पत्थर, बजरी, सल्फर की जानकारी उपलब्ध होती है। योगेंद्र के अनुसार जमीन में 18 00 फीट तक की गहराई तक पानी की स्थिति पता की जा सकती है।
40 बोरवेल खोदे, सभी में पानी
इस नवाचार के बाद झुंझुनूं जिले में विभिन्न स्थानों पर चालीस बोरवेल खोदे गए, जिनमें से पानी निकला है। इस तरह यह लगने लगा है कि ये सॉफ्टवेयर भविष्य में किसानों के लिए बहुत लाभदायक रहेगा।
Published on:
22 Aug 2019 11:35 am

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