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कौन हैं राजस्थान के अशोक यादव, जिनसे कांपते हैं नक्सली

इनके नेतृत्व में मुठभेड़ में 83 नक्सलियों को मार गिराया गया है। 161 नक्सलियों को गिरफ्तार किया तथा 56 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

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झुंझुनूं के अशोक यादव को सम्मानित करते सीआरपीएफ के डीजीपी ।

राजस्थान में एक वीर ऐसा ही भी है, जिससे बड़े-बड़े नक्सली कांपते हैं। उनकी वीरता को देखकर देश के राष्ट्रपति उनको चार बार वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके। नक्सलियों में उनका खौफ ऐसा बैठ गया कि उनके डर से कई आत्मसमर्पण कर चुके। झुंझुनूं जिले के पचेरी क्षेत्र के निकट रसूलपुर गांव निवासी सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के कमाण्डेंट अशोक कुमार यादव को अति संवेदनशील नक्सल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए बेस्ट कोबरा बटालियन ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने उनको यह ट्रॉफी पंद्रह अप्रेल को मध्य प्रदेश के नीमच में प्रदान की। यादव के नेतृत्व में इनकी कोबरा बटालियन ने अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर / सुकमा (छत्तीसगढ़) में सर्वोत्तम प्रदर्शन कर नक्सलवाद की रीढ़ की हड्डी तोड़ने का कार्य किया।

83 नक्सलियों को मार चुके

नक्सलियों के सबसे मजबूत पी.एल.जी.ए. ग्रुप को भागने पर मजबूर किया। भारत सरकार के मार्च 2026 के नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के प्राप्ति में वाहिनी कमाण्डर के रूप में बीजापुर पुलिस के साथ मिलकर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अभी तक यादव के नेतृत्व में 210 कोबरा वाहिनी ने 16 नए कैम्प (एफ.ओ.बी.) लगाए हैं। तर्रेम-पामेड़ रोड के परिचालन के एतिहासिक लक्ष्य में योगदान दिया है। इनके नेतृत्व में मुठभेड़ में 83 नक्सलियों को मार गिराया गया है। 161 नक्सलियों को गिरफ्तार किया तथा 56 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

वर्ष 2000 में सहायक कमाण्डेंट के पद पर भर्ती हुए

अशोक कुमार 14 अक्टूबर 2000 को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में सहायक कमाण्डेंट के रूप में भर्ती हुए। देश के उत्तर पूर्व में असम, जम्मू कश्मीर एवं छत्तीसगढ़ के बस्तर में बहादुरी का परिचय दिया। यादव को बहादुरी के लिए राष्ट्रपति चार बार पुलिस वीरता पदक से सम्मानित कर चुके। इसके अतिरिक्त वे राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) में भी सेवा दे चुके। उन्होंने बताया कि उनको आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान मां भगवती देवी व पिता शिव प्रसाद का रहा।

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