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11000 भर्तियों पर हाईकोर्ट की रोक, 17 फरवरी तक सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सोमवार को नर्स ग्रेड द्वितीय और एएनएम भर्ती 2018 पर अंतरिम रोक लगा दी है। इनमें 11 हजार पदों पर भर्ती होनी है। एसटी, एससी वर्ग में आरक्षण प्रमाण पत्र के मामले में न्यायालय ने राज्य सरकार से 17 फरवरी तक शपथ पत्र सहित जवाब मांगा है।

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11000 भर्तियों पर हाईकोर्ट की रोक, 17 फरवरी तक सरकार से मांगा जवाब

High court ban on 11000 recruitments, sought response from government

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सोमवार को नर्स ग्रेड द्वितीय और एएनएम भर्ती 2018 पर अंतरिम रोक लगा दी है। इनमें 11 हजार पदों पर भर्ती होनी है। एसटी, एससी वर्ग में आरक्षण प्रमाण पत्र के मामले में न्यायालय ने राज्य सरकार से 17 फरवरी तक शपथ पत्र सहित जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक भी मौजूद रहे।

नर्स ग्रेड द्वितीय और एएनएम भर्ती मामला
नर्स ग्रेड द्वितीय के लिए 30 मई 2018 को जारी विज्ञापन के जरिए 6035 पदों की भर्ती निकाली गई थी। इसमें लीलावती एवं सोनू वर्मा ने एसटी और एससी वर्ग से आवेदन किया। इनमें विवाह पश्चात के जारी जाति प्रमाण पत्र में पति का नाम था, जिसे विभाग ने मानने से इनकार कर दिया। जबकि काउंसलिंग के समय विवाह पूर्व का प्रमाण पत्र भी याचिकाकर्ताओं ने दिया था। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं को सामान्य वर्ग में रखते हुए चयन सूची से बाहर कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा, उनके श्रेणीवार अंतिम चयन सूची में दर्ज अंक से ज्यादा नंबर हैं। वे राजस्थान मूल के निवासी हैं और इसी वजह से प्रमाणपत्र में पिता या पति के नाम के आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता। विवाह पूर्व और विवाह पश्चात उनकी श्रेणी में कोई परिवर्तन नहीं है। इसी तरह का विवाद एएनएम भर्ती 2018 में भी सामने आया। इसमें 4936 पदों पर भर्ती होनी है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने राज्य सरकार को आरक्षण के संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिकता विभाग की ओर से जारी परिपत्र, शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिए।

जाति प्रमाण पत्र में पिता का नाम हो
राज्य सरकार की ओर से एएजी ने कहा कि विज्ञापन में कहा गया था कि जाति प्रमाण पत्र पिता के नाम से होना चाहिए। जातिगत आरक्षण पिता के नाम से तय होता है। इसी वजह से याचिकाकर्ताओं को सामान्य वर्ग में शामिल किया गया है।


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