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India Job Market Trends: दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले भारत का जॉब मार्केट एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। भारत में रोजगार बाजार के रुझानों से दो सकारात्मक संकेत निकलते हैं। 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम युवाओं वाले हमारे देश ने युवा कौशल की दिशा में अहम लैंडमार्क हासिल किया है। भारत में अब वैश्विक स्तर पर रोजगार योग्य स्नातकों की हिस्सेदारी अब 55% तक पहुंच गई है।
गौरतलब है कि इसमें महिलाओं की भी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। दूसरा संकेत टियर-2 और टियर-3 शहरों के उभार से मिलता है। भारत में बेंगलुरु और मुंबई जैसे महानगर भले ही अब भी करियर की पहली पसंद बने हुए हैं, लेकिन अब जयपुर, इंदौर, अमहदाबाद और कोच्चि जैसे टियर-2 शहर भर्तियों की रेस में मेट्रो शहरों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यह सिर्फ शिफ्ट नहीं, बल्कि 'रिवर्स माइग्रेशन' की शुरुआत है। सीआईआई और टैग्ड की हालिया इंडिया डिकोडिंग जॉब्स रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां मेट्रो में हायरिंग स्थिर है, वहीं छोटे शहरों में भर्तियों में बढ़त दर्ज की जा रही है। उनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चेतावनी देता है कि सिर्फ तकनीक से भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। 'टैलेंट' ही असली अंतर पैदा करेगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत का उदय केवल उसके बड़े आकार के वर्क फोर्स के कारण नहीं है, बल्कि उस रणनीतिक क्षमता और अनुकूलनशीलता के कारण है जो यहां का टैलेंट हर क्षेत्र में ला रहा है। हम एक ऐसा बदलाव देख रहे हैं जहां भारत अब वैश्विक ऑपरेशन्स के लिए केवल एक सपोर्ट बेस नहीं रह गया है; बल्कि अब यह नवाचार, नेतृत्व और हाई-वैल्यू एडिशन का मुख्य केंद्र बन चुका है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के तेजी से होते विस्तार के साथ, भारत का वर्कफोर्स अब इस बात में निर्णायक भूमिका निभा रहा है कि दुनिया भर की कंपनियां अपनी रणनीतियां कैसे बनाती हैं, समाधान कैसे तैयार करती हैं और वैश्विक स्तर पर कैसे प्रतिस्पर्धा करती हैं।
दुनिया के कुल 3,400 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में से आधे अकेले भारत में स्थित हैं और अब हर साल इसमें 120-150 नए सेंटर्स और जुड़ने की उम्मीद है। दूसरी ओर, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टैलेंट में सालाना 55% की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसकी संख्या अब लगभग 23.5 लाख आंकी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2017 के मुकाबले कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 2 गुना बढ़ गई है। वर्कफोर्स में महिलाओं की मौजूदा भागीदारी है 23 फीसदी है और 2026-27 में महिलाओं की भर्ती में हिस्सेदारी 30 रहने का अनुमान है।
तरक्की के साथ-साथ रिपोर्ट एक 'स्किल गैप' की ओर भी इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, एवियेशन सेक्टर में टियर-2/3 शहरों के नए एयरपोर्ट्स पर 27% योग्य स्टाफ की कमी है। इतना ही नहीं, भारत को सालाना 2000 पायलट चाहिए, लेकिन सप्लाई केवल 100-1200 की है।
रिपोर्ट आश्वस्त करती है कि भारत का 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' अब मैच्योर हो रहा है। जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद, कोच्चि जैसे शहरों में पूर्ण-स्तरीय कार्यालयों का खुलना यह दर्शाता है कि कंपनियां अब 'टैलेंट' की तलाश में वहां पहुंच रही हैं, जहां वह वास्तव में रहता है। 2026 में टियर-2 शहर केवल विकल्प नहीं, बल्कि विकास के असली इंजन बन चुके हैं।
Published on:
12 Jan 2026 04:17 am
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