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जोधपुर के इस अनूठे मंदिर में गणेश ने काला-गोरा भैरुजी को जंजीरों से बांध रखा है, 1 हजार से अधिक पुराना है इतिहास

मंडोर उद्यान परिसर में गणपति का ऐसा अनूठा मंदिर है जहां विराजित प्रथम पूज्य गणेशजी ने दाएं-बाएं काला और गोरा भैरुजी को जंजीरों से बांध रखा है। एक विशाल चट्टान को तराश कर बनाई गई तीनों मूर्तियां 15 फीट की हैं।

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1 thousand year old ganesh temple at mandore garden of jodhpur

जोधपुर के इस अनूठे मंदिर में गणेश ने काला-गोरा भैरुजी को जंजीरों से बांध रखा है, 1 हजार से अधिक पुराना है इतिहास

जोधपुर. मंडोर उद्यान परिसर में गणपति का ऐसा अनूठा मंदिर है जहां विराजित प्रथम पूज्य गणेशजी ने दाएं-बाएं काला और गोरा भैरुजी को जंजीरों से बांध रखा है। एक विशाल चट्टान को तराश कर बनाई गई तीनों मूर्तियां 15 फीट की हैं। दांयी ओर गोरे और बांयी ओर काले भैरुजी तथा मध्य में गणेशजी रिद्धि-सिद्धि सहित विराजित हैं। भगवान गणेश मंदिर में मूषक को उनके चरणों में दर्शाया गया है। जोधपुर ही नहीं मारवाड़, गोडवाड और देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनूठे मंदिर के दर्शनार्थ आते हैं। नवविवाहित जोड़े मंगलमय जीवन का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। गणेशजी के गले में शेषनाग भी है।

देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले मारवाड़ के प्रवासी लोग विवाह के बाद और बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए मंदिर आते हैं और ढोल-थाली बजवाकर आभार जताते हैं। तत्कालीन महाराजा अजीतसिंह के कार्यकाल 1707 से 1724 के दौरान मंडोर उद्यान में निर्मित देवताओं की साळ से सटे गणेश मंदिर में तीनों देवताओं का नियमित पूजन होता है। जैसलमेर के रामदेवरा में प्रतिवर्ष भाद्रपद माह में आयोज्य रामदेवरा मेले के दौरान पूरे एक माह यहां मेले सा माहौल रहता है।

रामदेवरा दर्शनार्थ देश के कोने-कोने से आने वाले पैदल श्रद्धालु यात्रा सकुशल पूरी करने के बाद आभार जताने भैरु-गणेश दरबार जरूर आते हैं। पुष्पविक्रेता कल्याण समिति के विक्रमसिंह गहलोत ने बताया कि गणेश की मूर्ति को एक हजार साल पूर्व मांडव्यपुर व मारवाड़ की राजधानी रहे मंडोर के समय की माना जाता है। मंदिर में वर्ष में दो बार भाद्रप्रद और पौष मास की अमावस्या को पुष्प उत्सव मनाया जाता है।