
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटी सरहद पर सीमा सुरक्षा बल की 2 हजार से अधिक महिला कांस्टेबल व सब इंस्पेक्टर दिन-रात पहरा दे रही हैं। पाकिस्तान के साथ तनाव के बावजूद बीएसएफ ने अपनी महिला टुकड़ी को पीछे नहीं किया है बल्कि उन्हें और अधिक हथियार व जोश के साथ मोर्चे पर डटे रहने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान में श्रीगंगानगर से लेकर बाड़मेर तक धोरों के बीच बीएसएफ की महिला जवान ऊंट व चार पहिया वाहनों के साथ गश्त कर रही हैं। बीएसएफ की महिला टुकड़ी को 10 साल पूरे हो गए हैं।
भारत व पाकिस्तान के मध्य 1965 में हुए युद्ध के बाद उसी साल एक दिसम्बर को बीएसएफ की स्थापना की गई थी लेकिन इसमें महिलाओं की भर्ती वर्ष 2008 में शुरू हुई। वर्ष 2009 में 745 महिला कांस्टेबल की भर्ती की गई। वर्तमान में बीएसएफ में 3 हजार 720 महिला जवान हैं। जिसमें से सौ महिलाएं सब इंस्पेटर व डिप्टी कमाण्डेंट के पद पर हैं। बीएसएफ ने महिला जवानों को कॉम्बेक्ट ड्यूटी पर लगाया है। यानी इन महिलाओं को भी ऑपरेशनल, सिक्योरिटी व इंटेलीजेंस तीनों ही प्रकार की ड्यूटी देनी पड़ती है। पुरुषों के बराबर ही इनका प्रशिक्षण होता है।
हर साल एक हजार महिला जवानों की भर्ती का लक्ष्य
केंद्र सरकार के आम्र्ड फोर्सेज में 5 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती की अनिवार्यता के बाद बीएसएफ में भी महिलाओं का प्रवेश हुआ। पिछले दस साल में बीएसएफ में महिलाओं की भर्ती काफी कम हुई लेकिन अब हर साल एक हजार महिला जवानों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। बीएसएफ अपनी विभिन्न बटालियन में करीब 8 हजार महिला जवान की नफरी रखेगी।
बॉर्डर पर महिला बैरक भी
श्रीगंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर बॉर्डर पर पुरुष जवानों के समानांतर महिला जवानों की भी दिन-रात ड्यूटी रहती है। जो महिलाएं अपने साथ बच्चों को रखती हैं उन्हें मुख्यालय ड्यूटी पर लगाया जाता है। मुख्यालय में क्रेच (शिशु पालना गृह ) बने हुए हैं। महिलाओं की अधिक भर्ती होने पर अब सीमा पर भी बीएसएफ क्रेच बनाएगी। वैसे धोरों पर महिला जवानों की टुकड़ी के लिए अलग से बैरक की व्यवस्था है। उनके लिए अलग से महिला प्रभारी अधिकारी भी होती है।