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नारी निकेतन में 33 में से 29 महिलाएं मानसिक रोगी, हाईकोर्ट ने लिया गंभीरता से

- तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की हिदायत- नारी निकेतनों व बालिका गृहों मेंं स्मार्ट टेलीविजन लगाने के निर्देश

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जोधपुर। जोधपुर स्थित नारी निकेतन में 33 में से 29 महिलाएं किसी न किसी प्रकार के मानसिक रोग या बीमारी से पीडि़त हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता को एमडीएम अस्पताल अधीक्षक से समन्वय स्थापित करने को कहा है, ताकि मानसिक समस्याओं से पीडि़त महिलाओं के लिए प्रशिक्षित महिला परामर्शदाता की प्रतिदिन व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक नारी निकेतनों में खाली पड़े पद भरने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा मनोज कुमार गर्ग की खंडपीठ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह तथ्य ध्यान में लाया गया कि नारी निकेतन में तैनात एएनएम केवल आठ घंटे ड्यूटी पर रहती है और उसके बाद चिकित्सा स्थिति के कारण आक्रामकता दिखाने वाली महिलाओं से अधीक्षक व अन्य स्टाफ को जूझना पड़ता है। इसे देखते हुए कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष व्यास को आवश्यक प्रयास करने को कहा। अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली ने 28 जनवरी को दिए गए निर्देशों की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की। इस पर खंडपीठ ने कहा कि यह निर्देशों के आंशिक अनुपालन को इंगित करती है। हाईकोर्ट ने राज्य के सभी नारी निकेतनों, बालिका गृहों तथा संप्रेषण गृहों में स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि वहां निरुद्ध महिलाओं और बच्चों को उम्र के हिसाब से प्री-रिकोर्डेड कोर्सेज के माध्यम से कौशल उन्नयन शिक्षा दी जा सके। पीठ ने उम्मीद जताई कि सुनवाई की अगली तिथि तक इस निर्देश का अनुपालन सकारात्मक रूप से किया जाएगा।