
5 गुणा 5 की दुलर्भ गांठ का एमजीएच में ऑपरेशन
जोधपुर. महात्मा गांधी अस्पताल में युवती (21) का रेट्रोपेरीटोनियल लिंफेंजियोमा बीमारी का उपचार किया गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि पश्चिमी राजस्थान में ये पहला मामला मिला है।
सर्जरी विभाग के सहआचार्य डॉ. दिनेश दत्त की यूनिट में मरीज पिछले 2 साल से कमर एवं पेट में दर्द की शिकायत के साथ भर्ती हुई। पड़ताल में मरीज की सोनोग्राफी तो नॉर्मल मिली, लेकिन दर्द में किसी प्रकार का आराम नहीं था। पेट की सीटी स्कैन व एमआरआई कराई गई तो पता लगा कि मरीज के शरीर में 5 सेंटीमीटर गुणा 5 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ है, जो दुर्लभ है। यह दुर्लभ गांठ इनफेरियर वेना कावा ( पीठ वाले हिस्से में एक बड़ी नस ) और एओरटा (महाधमनी), जो पेट में खून की सबसे बड़ी नसें होती हैं, उनके बीच में तथा आईवीसी के साइड में रेट्रोकेवल स्पेस में मौजूद मिली। डॉ. दिनेश दत्त ने कहा कि रेट्रोपेरीटोनियल ट्यूमर का इस स्थान पर होना और भी अधिक दुर्लभ होता है, सर्जरी करने के लिए अत्यंत जटिल जगह होती है।
शरीर के कई अंगों को ऊपर उठाना पड़ाडॉ. दिनेशदत्त ने बताया कि मरीज की यह गांठ पेट में पीछे के हिस्से की तरफ आईवीसी और एओरटा के साथ दायीं तरफ की एड्रिनल ग्लैंड, दायीं रिनल वैन, दायीं क्रश ऑफ डायग्राम एवं रीड की हड्डी के बीच थी। जिसको निकलने के लिए दाएं साइड की बड़ी आंत, डुओडेनम, पेनक्रियाज और अमाशय की डिस्टल पार्ट को पूरा ऊपर उठा कर बाएं साइड में लेना पड़ा, ताकि गांठ तक पहुंचा जा सके। गांठ को इसके आसपास के स्ट्रक्चर से अलग करना काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकी यदि इस जगह पर थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो कुछ भी कॉम्प्लिकेशन हो सकते थे। दाएं साइड के एड्रिनल ग्लैंड से गांठ को अलग करते समय मरीज का ब्लड प्रेशर भी शूटआउट होने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन टीम ने बेहतर तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने बताया कि यह गांठ 10 लाख से अधिक पॉपुलेशन में एक मरीज के होती है तथा पश्चिमी राजस्थान का इस जगह की गांठ का यह संभवत पहला ऑपरेशन है। रेट्रोपेरीटोनियल लिंफेंजियोमा के पूरी दुनिया में आज तक 200 केस ही रिपोर्ट हुए हैं । जिनमें रेट्रो केवल ट्यूमर की संख्या तो बहुत ही कम है। प्रिंसिपल डॉ. दिलीप कच्छवाह व अधीक्षक डॉ. राजश्री बेहरा ने सर्जरी व एनेस्थेसिया की पूरी टीम को बधाई दी। टीम में डॉ. शर्मा के साथ सीटीवीएस सर्जन डॉ. अभिनव सिंह , डॉ. विनोद, डॉ.मनोज, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. एफएस भाटी, डॉ. भारत चौधरी,डॉ. रश्मि सायल, नर्सिंग टीम में इंचार्ज अरविंद अपूर्वा, लक्ष्मी एवं हंसराज का सहयोग रहा।
Published on:
17 Aug 2022 08:58 pm
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