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साल में 73 घूसखोर कर्मचारी पकड़े, सर्वाधिक भ्रष्टाचार जोधपुर में

- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की संभाग में कार्रवाई- वर्ष 2021 की तुलना में भ्रष्टाचार 60 प्रतिशत बढ़ा- आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित और पद के दुरुपयोग के सिर्फ 3-3 मामले दर्ज

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जोधपुर।
संभाग के छह जिलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार जोधपुर जिले में सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जोधपुर संभाग के छह जिलों में वर्ष 2022 में भ्रष्टाचार से घिरे 73 कर्मचारियों पर ट्रैप की कार्रवाई की है। इनमें से सर्वाधिक 16 जोधपुर और सबसे कम 5 सिरोही चौकी की ओर से की गई है।
कोरोना के बाद दोगुना हुआ भ्रष्टाचार
वर्ष 2020 कोरोना से प्रभावित रहा था। एसीबी के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2020 में रिश्वत लेने की 44 एफआइआर दर्ज की गई थी। आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने की 2 और पद के दुरुपयोग की तीन एफआइआर दर्ज की गई थी। अगले ही वर्ष यानि 2021 में ट्रैप की संख्या बढ़कर 73 पहुंच गई थी। वहीं, आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने की 5 एफआइआर और पद के दुरुपयोग की 9 एफआइआर दर्ज की गई थी। वर्ष 2022 में भी ट्रैप की कार्रवाई 73 ही दर्ज हुई थी, लेकिन आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित और पद के दुरुपयोग करने की तीन-तीन एफआइआर दर्ज हुई है।
रिश्वत लेने पर जोधपुर में 27 मामले दर्ज, सिरोही में 5
एसीबी जोधपुर मुख्यालय के अधीन जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, जालोर व सिरोही जिले हैं। जोधपुर में जोधपुर सिटी, ग्रामीण, विशेष यूनिट व इंटेलीजेंस चौकी है। जोधपुर शहर में 5, ग्रामीण 4 व विशेष यूनिट में 18, पाली में पाली प्रथम व द्वितीय चौकी हैं। वर्ष 2022 में जोधपुर में ट्रैप के सर्वाधिक 27 मामले दर्ज किए गए थे। पाली प्रथम चौकी में 5 व द्वितीय में 2, जालोर में 16, बाड़मेर में 12, जैसलमेर में 6 और सिरोही में 5 मामले दर्ज किए गए हैं।
एमओ केस : विभागाध्यक्ष या सरकारी अनुमति से अडंगासरकारी महकमे में मिस यूज ऑफ ऑफिस यानि एमओ के मामले दर्ज होने में कमी आने लगी है। इसके पीछे जुलाई 2018 में हुए एक्ट में संशोधन माना जा रहा है। इसके तहत पद के दुरुपयोग का मामला पकड़ में आने पर संबंधित विभाग या विभागाध्यक्ष अथवा सरकार की अनुमति के बाद ही कर्मचारी के खिलाफ एसीबी एफआइआर दर्ज की जा सकेगी। पिछले दो-तीन साल से इस संशोधन को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इसी के चलते एमओ के मामले काफी दर्ज हो रहे हैं।
आय से अधिक सम्पत्ति : 3 साल में सिर्फ 8 मामले
एसीबी के लिए आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने वालों का पता लगाना काफी चुनौतीपूर्ण काम है। यही वजह है कि आय से अधिक सम्पत्ति यानि डीए के वर्ष 2020 में सिर्फ 2, वर्ष 2021 में 5 और वर्ष 2022 में सिर्फ 3 एफआइआर दर्ज की गई है।
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आंकड़ों की नजर में एसीबी में दर्ज एफआइआर
वर्ष——————ट्रैप———–डीए————-एमओ
2020—————44————-2—————3
2021—————73————-5—————9
2022—————73————-3—————3
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एसीबी में दर्ज मामलों के निस्तारण के आंकड़े
वर्ष——————ट्रैप———–डीए————-एमओ
2020—————30————1—————-14
2021—————60————2—————-13
2022—————64————3—————-14
(नोट : ट्रैप यानि रिश्वत लेने, डीए यानि आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करना और एमओ यानि पद के दुरुपयोग करना है।)