
bhanwari devi, jodhpur
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर 51 न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। जिसके तहत जोधपुर महानगर में एडीजे-3 मधुसूदन मिश्रा को विशिष्ट न्यायालय (अनुसूचित जाति-जनजाति मामलात) की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अब वही बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी के अपहरण व हत्या के मामले की सुनवाई करेंगे।
इसी प्रकार एमएसीटी कोर्ट जोधपुर महानगर के न्यायाधीश भंवरलाल बुगालिया को ईसी एक्ट के तहत मामलों की विशेष अदालत का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। तो एसीजे-एमएम 9 ललित पुरोहित एनआई एक्ट कोर्ट संख्या 1 जोधपुर महानगर की जिम्मेदारी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल एक साल में पूरा करने के दिए निर्देश
बहुचर्चित भंवरी देवी के अपहरण व हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गत 11 जून को ट्रायल कोर्ट को एक साल की अवधि में ट्रायल पूर्ण करने के आदेश दिए थे। मामले के सहआरोपी रेशमाराम को जमानत पर रिहा करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए।
न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोष व न्यायाधीश अमिताव रॉय की खण्डपीठ ने सीबीआई की याचिका निस्तारित करते हुए रेशमाराम को दी गई जमानत के आदेश में हस्तक्षेप से भी इनकार कर किया था।
सहआरोपी रेशमाराम को राजस्थान उच्च न्यायालय ने 23 मई, 2013 को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे। सीबीआई ने जमानत रद्द करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर दी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
ऐसे में उच्चतम न्यायालय ने जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं मानते हुए उच्च न्यायालय के आदेश को बहाल रखा। प्रत्यर्थी रेशमाराम की ओर से मामले में ट्रायर विचाराधीन होने का तथ्य पेश किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की अवधि में ट्रायल पूर्ण करने के आदेश दिए।
दो साल से चल रहा ट्रायल
सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार उक्त घटना 1 सितम्बर 2011 की है। जिसमें 4 अक्टूबर, 2012 को अदालत ने आरोप तय किए थे। 23 जून, 2014 से अनुसूचित जाति-जनजाति मामलों की विशेष अदालत में मामले का विचारण (ट्रायल) चल रहा है। मामले में कुल 298 गवाह हैं, जिनमें से 101 गवाहों की गवाही फिलहाल हो चुकी है।
मदेरणा की जमानत याचिका हो गई थी खारिज
मदेरणा ने गिरफ्तारी के सवा चार साल बाद पहली बार जमानत याचिका पेश की थी। मदेरणा की ओर से कहा गया था कि वह निर्दोष है। राजनीतिक कारणों से उनको झूठा फंसाया गया है। वह सवा चार साल से जेल में है और अस्वस्थ है। इस मामले में सीबीआई को 298 गवाहों के बयान कराने हैं। जबकि अभी तक केवल 94 गवाहों के ही बयान हुए हैं।
ऐसे में विचारण में लम्बा समय लगने की संभावना को देखते हुए उनको जमानत पर रिहा किया जाए। सीबीआई की ओर से कहा गया कि आरोपियों के खिलाफ अदालत के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है। उनको जमानत पर रिहा करने से वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस मामले के अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत नहीं मिली है। आरोपी की उम्र अधिक हो गई, लेकिन जेल में कैदियो का समय-समय पर उपचार करवाया जाता है। केवल उम्र और बीमारी के आधार पर जमानत देना उचित नहीं है।
Published on:
15 Jun 2016 12:31 pm
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