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अब मरीजों की देखभाल में होगा इनोवेशन

- एम्स में पहली राष्ट्रीय नर्सिंग कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने रखे सुझाव - भविष्य में नर्सिंग स्टडी के लिए इनोवेटिव शोध पर रहेगा जोर

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बासनी (जोधपुर). नर्सिंग के क्षेत्र में होने वाले शोध की सार्थकता का पैमाना मरीजों की देखभाल से शुरू होता है जिसमें सबसे पहले ये देखना जरूरी है कि शोध कितना सकारात्मक है।

इसी फीडबैक को देखकर ही उसे नर्सिंग की नियमित प्रेक्टिस में लाना होगा। ये बात एम्स ऋषिकेश के नर्सिंग कॉलेज डीन डॉ. सुरेश शर्मा ने कही। वे एम्स में आयोजित पहली राष्ट्रीय नर्सिंग कॉन्फ्रेंस में मरीज की देखभाल में शोध के इनोवेशन की महत्ता बता रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी एक विषय पर अलग अलग 100, 200 या 1000 लोगों पर स्टडी कर शोध किए जाते हैं। उन सभी को एक पूल बनाकर उसका निष्कर्ष निकालना होता है अगर यह निष्कर्ष सकारात्मक है उसे प्रेक्टिस में लाना चाहिए। शोध को स्टडी में लाने के लिए उसका सही डिजाइन का चयन करना आवश्यक है ताकि मरीज को उसका लाभ मिले।

उदाहरण देकर समझाया इनोवेशन

शर्मा ने बताया कि उदाहरण के तौर पर शुगर के मरीज को इंसुलिन के इंजेक्शन एक जगह न लगाकर अलग अलग जगह लगाना चाहिए। इससे उसकी स्किन स्वस्थ रहती है जिससे इंसुलिन गुणवत्ता के साथ अपना काम करता है। अभी इस तरह के शोध के इनोवेशन नर्सेज को जनरल में और व्याख्यान के जरिए ही पता चलते हैं। इन्हें एकेडमिक स्टडी में शामिल करने के लिए काम चल रहा है। उसके बाद ये रूटीन स्टडी में शामिल हो जाते हैं। जिसका फायदा मरीजों की देखभाल में देखने को मिलेगा।

विदेशों में होने वाले शोध पर कम हो निर्भरता

एम्स पटना के डॉ. रतीश नय्यर ने बताया नर्सिंग की पढाई को गुणवत्ता पूर्ण तरीके के पढाने के लिए कॉलेज और देश के अंदर शोध गतिविधियां ज्यादा होनी चाहिए। वर्तमान में नर्सिंग की स्टडी विदेशों में होने वाले शोध पर निर्भर है। इसके लिए भारत में नर्सिंग क्षेत्र में शोध कार्यों को बढाना होगा ताकि यहां के अस्पतालों में यहीं की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल शोध का फायदा मिल सके। इसके लिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की ओर से जल्द ही प्रस्ताव सरकार को भेजे जाएंगे।

कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन आज

कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण में जोधपुर एम्स के नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या प्रो. राजरानी ने वर्तमान युग में शोध की महत्ता बताई। डॉ. नरेश नेभिनानी, डॉ. सुखपाल कौर, डॉ. नीरज गुप्ता ने शोध में नैतिकता के विषय पर व्याख्यान दिए। डॉ. सुरजीत घटक व डॉ. प्रवीण शर्मा ने सेशन की अध्यक्षता की। डॉ. अशोक कुमार व दीपिका खाका ने कम प्रयोग में आने वाले शोध के तरीकों के बारे में बताया। कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन समारोह शुक्रवार को होगा।