
Musician Anilkumar Asopa recites film songs on flute and sexophone
जोधपुर ( jodhpur news.current news ) .वे ब्लूसिटी के सुरीले फनकार हैं। बहुत ही शानदार म्यूजिशियन ( musician ) । ट्रेडिशनल बांसुरी ( flute ) हो या मॉडर्न सेक्सोफोन( sexophone ) , उनका वादन दिलकश होता है। उन्होंने फिल्मी गाने बांसुरी और सेक्सोफोन पर हूबहू बजा कर जोधपुर ही नहीं, पूूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है। ये हैं जोधपुराइट म्युजिशियन अनिलकुमार आसोपा ( Anilkumar Asopa ) । खास बात यह है किउनकी हमेशा कुछ नया वाद्य सीखने की प्रवृत्ति ने वेस्टर्न फ्लुट की ओर रुख किया। उन्होंने बांसुरी और वेस्टर्न फ्लुट में कुछ समानता होने की वजह से कम समय में निरंतर अभ्यास से यह जल्द सीख लिया था। उन्हें सेक्सोफोन म्युजिकल इंस्ट्रुमेंट ने बहुत आकर्षित किया। वेस्टर्न फ्लूट से सेक्सोफोन सीखने में बहुत मदद मिली यू-ट्यूब से देख-देख कर घंटों अभ्यास कर के सेक्सोफोन सीखा और उसके बाद गिटार और मेलोडिका पर रियाज किया। पत्रिका ने उनके म्युजिक के सफर पर उनसे बात की। देखिए पत्रिका की उनके साथ बातचीत( interview ) :
हमेशा कुछ नया सीखते रहने से उत्साह
जोधपुराइट म्युजिशियन अनिलकुमार आसोपा ने एक सवाल के जवाब में कहा, जीवन में हमेशा कुछ नया सीखते रहने से उत्साह बना रहता है और खुद सीख कर दूसरों को सिखाने में आत्म संतुष्टि होती है। संगीत शिक्षा को कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का कार्य सिर्फ विद्यालय के माध्यम से किया जा सकता है। इसलिए संगीत शिक्षक का कार्य चुना। सीखने और सिखाने, दोनों में आनंद की प्राप्ति होती है। आजकल के व्यस्त जीवन में मस्तिष्क को आराम देना बहुत जरूरी है। बच्चों से लेकर बड़े तक डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। उन्हें संगीत के माध्यम से इस स्थिति से बाहर निकाला जा सकता है। संगीत में ऐसी शक्ति है जिसे सीखने से एकाग्रता व धैर्य की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। यह ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरलतम रास्ता स्वर है। मैं यही कहूंगा कि संगीत आत्मा का भोजन है।
किशोर और आरडी बर्मन
आसोपा ने एक सवाल के जवाब में कहा, स्कूल टाइम से ही क्लास में डेस्क बजाकर गाना गाने का शौक था स्कूल में किसी भी गायन प्रतियोगिता में भाग लेने से नहीं चुके. रेडियो पर पुराने गाने सुनना तो जैसे दिनचर्या का हिस्सा था विविध भारती और ऑल इंडिया रेडियो से प्रसारित होने वाले पुराने गानों के सभी कार्यक्रम शौक से सुनाता था। कई बार तो रात को तकिये के सरहाने रेडियो रख कर गाना सुनने से बैटरी डिस्चार्ज हो जाती थी। किशोर दा के गाने सुनते हुए गुनगुनाना अच्छा लगता था। आर डी बर्मन साहब का संगीत और उसमें प्रयोग किए गए वाद्य यंत्र मन को बहुत आकर्षित करते थे।
एेेसे शुरू हुआ सफर
उन्होंने बताया, मेरी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर से शुरू हुई। बीकानेर के प्रथम गुरु मोहन सोनी ने बांसुरी, हारमोनियम और माउथ ऑर्गन पर पुराने गाने, बारीकियों और रिद्म के साथ बजाना सिखाया और संगीत भारती का रास्ता दिखाया, जहां द्वितीय गुरु संगीत मनीषी मुरारी शर्मा से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और गुरु के आशीर्वाद से संगीत में 5 साल के डिप्लोमा, संगीत विशारद के साथ संगीत भूषण भी किया। गुरुजी अलंकार सीखने पर बहुत जोर देते थे और अलग-अलग रागों में अलंकार किस प्रकार गाए जाते हैं। यह बड़ी सहजता से बताया था।
संगीत की प्यास और बढ़ गई
आसोपा ने बताया, मेरा किसी काम से जयपुर जाना हुआ था, जहां गोविंद देव मंदिर में तृतीय गुरु पंडित आलोक भट्ट के सान्निध्य में भक्ति संध्या चल रही थी और उस संगीत ने बहुत प्रभावित किया। तब संगीत की प्यास और बढ़ गई और 2 साल गुरु जी के सान्निध्य में रह कर सुगम संगीत, शास्त्रीय संगीत व पाश्चात्य संगीत की शिक्षा प्राप्त की। साथ ही जयपुर आकाशवाणी से सुगम संगीत में बी ग्रेड पास किया।
रामायण व भागवत कथा में बांसुरी
उन्होंने बताया, संगीत के क्षेत्र में कार्य की शुरुआत रामायण व भागवत कथा में बांसुरी बजाने से हुई। लगातार 7-8 साल महान संतों का सान्निध्य मिला और आध्यात्मिक प्रवचन में बांसुरी वादन किया और उसके बाद कई भजन, गजल, लोक संगीत के कार्यक्रमों में संगत की। ढेरों रिकॉर्डिंग्स में बांसुरी वादन किया। अलग अलग इंस्ट्रुमेंट बजाना अच्छा लगताउन्होंने बताया, बचपन से ही फिल्म संगीत में रुचि रही पुराने गाने गाना और उनको अलग अलग इंस्ट्रुमेंट पर बजाना अच्छा लगता था। भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखने का बहुत फायदा मिला। किसी भी कम्पोजिशन समझने में शास्त्रीय संगीत की बहुत बड़ी भूमिका है। इसलिए संगीत के सभी नए विद्यार्थियों से यही कहूंगा कि शास्त्रीय संगीत अवश्य सीखें। इससे स्वर ज्ञान व ताल ज्ञान होने पर संगीत के किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩे में मदद मिलेगी।
Published on:
10 Dec 2019 12:58 pm
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
