
जोधपुर . हिंदू सेवा मंडल की ओर से आयोजित विशाल सात दिवसीय भोगिशैल परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ गुरुवार को घंटाघर स्थित हिंदू सेवा मंडल कार्यालय के बाहर किया गया। गाजे बाजों के साथ हिंदू सेवा मंडल के स्वयंसेवक घंटाघर से रवाना होकर सोजती गेट स्थित गढ़ लंबोदर गणेश में विधिवत पूजन कर मोहनपुरा पुलिया होते हुए रातानाडा पहुंचे।
आस्था के सात दिवसीय सफर में मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने जोधपुर पहुंच रहे हैं।
गुरुवार को पहला पड़ाव रातानाडा क्षेत्र में होगा श्रद्धालु आसपास के धार्मिक स्थल बिछडिया गणेश मंदिर और रातानाडा गणेश मंदिर के दर्शन करने के बाद भाटिया चौराहे के पास अपना पहला पड़ाव डालेंगे।
क्या है भोगिशैल परिक्रमा
जिस मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास कहलाता है। इस मास में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। लेकिन धार्मिक दृष्टि व दान-पुण्य के लिए पुरुषोत्तम मास श्रेष्ठ माना गया है। पुरुषोत्तम मास में भोगिशैल परिक्रमा भक्ति और आराधना का अनुपम अवसर माना जाता है। ‘भोगि’ का अर्थ ‘नाग’ और ‘शैल’ का अर्थ ‘पर्वत’ होता है। परिक्रमा के अधिकांश पड़ाव प्रकृति की गोद में हैं। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर प्रकृति की गोद में स्थित धार्मिक स्थलों की पदयात्रा रोमांचक अनुभवों से परिपूर्ण होती है। दो दशक पूर्व तक यह परिक्रमा अत्यंत कठिन मानी जाती थी। अब हालात में काफी बदलाव आया है। संचार क्रांति के चलते परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु निरंतर परिजनों के सीधे सम्पर्क में रहते हैं।यूं रहेगा आस्था का सफर24 मई को रातानाडा, 25 को चौपासनी, 26 को बड़ली, 27 को बैद्यनाथ, 28 को बेरीगंगा, 29 को मंडोर उद्यान में पड़ाव होगा। इस दौरान श्रद्धालु विनायकिया के बिछडिय़ा गजानन, रिक्तियां भैरुजी, चौपासनी श्याम मनोहर, अरना-झरना, भद्रेश्वर महादेव, मंडलनाथ, जोगीतीर्थ, दईजर माता, बेरीगंगा, मंडोर उद्यान के धार्मिक स्थल, निम्बा-निम्बड़ी, संतोषी माता मंदिर, कुंजबिहारी, गंगश्यामजी मंदिर के दर्शन कर परिक्रमा पूर्ण करेंगे।