
Bilara cotton
बिलाड़ा क्षेत्र के किसानों का कपास अब देश में ही नहीं विदेशों में धूम मचा रहा है। अन्य देशों को भी बिलाड़ा का कपास भाने लगा है। देश के बाहर चीन, कोरिया, जापान, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश तक यहां के कपास की मांग बढ़ी है। यहां का कपास राजफैड, नेफैड ही नहीं भारतीय कपास निगम तक भी खरीदने लगा है तथा प्रोसेसिंग करवाकर उनकी गांठे देश-विदेश में भेज रहा है।
जानकारों का मानना है कि जब से यहां के व्यापारियों ने आड़त काटने का सिलसिला बंद किया तभी से यहां कि मंडी में एकाएक कपास की आवक बढ़ी। मंडी में पाली, नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर जिलों के अलावा रणसीगांव, बोरून्दा, भोपालगढ, आसोप, मेड़ता क्षेत्र का कपास भारी मात्रा में आने लगा है।
कॉटन की हो रही प्रोसेसिंग
मंडी में कपास की आवक बढऩे और दूसरे देशों में इसकी मांग बढऩ के साथ यहां जिनिंग फैक्टियां की संख्या बढऩे लगी। कुछ वर्षों पहले तक पाली, ब्यावर, विजय नगर, गुलाबपुरा और भीलवाड़ा की मिलों तक कपास बोरे भरकर जाते थे। लेकिन एक दशक में यहां कपास की गांठे बांधने की प्रोसेसिंग मशीनें लगने लगी।
बीटी किस्म कपास की आवक ज्यादा
किसानों का बीटी किस्म की कपास में रूचि बढऩे से मंडियों में कपास की आवक बढ़ गई है। इस दौरान आस-पास के बोरून्दा, आसोप, भोपालगढ़ में भी कपास खरीद के व्यापारी व जिनिंग फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ गई। व्यापारियों ने बताया कि प्रतिवर्ष बिलाड़ा की विभिन्न प्रोसेसिंग कम्पनियों में डेढ़ लाख गांठे बंध रही है तथा विभिन्न प्रदेशों के व्यापारियों द्वारा खरीदी जा रही है। उन्नत किस्म की बीटी कपास को पंजाब के व्यापारी पसंद करने लगे हैं तथा खरीद कर अन्य देशों में निर्यात करने लगे है।
एक दशक पहले हमने कपास की गांठे बांधने की प्रेसेसिंग मशीनें लगाई, धीरे-धीरे मशीनों की संख्या बढ़ाई और अब प्रतिवर्ष 10 से 15 हजार गांठे कपास की बंध जाती है।
- बाबूलाल पटेल, संचालक, जिनिंग एवं प्रोसेसिंग कम्पनी, बिलाड़ा
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