
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया। ( फोटो: ANI)
2022 voter data probe : देश में वोट चोरी (Karnataka Voter Data Theft) का मामला फिर से गर्मा गया है। बात यह है कि इस बार सियासत की बिसात पर शतरंज की गोटियां जमी हुई हैं और खेल कर्नाटक में चल रहा है। दरअसल इस प्रदेश की सियासत में 'स्कैम बनाम स्कैम' का एक नया और खतरनाक अध्याय शुरू हो गया है। मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले और वाल्मीकि निगम मामले में चौतरफा घिरे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अब अपनी 'सियासी ढाल' को 'तलवार' में बदल दिया है। उन्होंने 2022 के बहुचर्चित 'वोटर डेटा चोरी' मामले (Chilume Trust Scam) की जांच पुलिस से छीन कर विशेष जांच दल (SIT Probe Karnataka) को सौंपने का आदेश दिया है। यह खबर सिर्फ एक पुरानी फाइल के खुलने की नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सियासी बिसात बिछी हुई है। आइए इस मामले का पूरा 'पोस्टमार्टम' करते हैं और समझते हैं कि आखिर सिद्धारमैया ने यह दांव अब क्यों चला।
यह मामला 2022 का है, जब कर्नाटक में बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार थी। आरोप लगा कि 'चिलुमे' (Chilume) नामक एक एनजीओ को चुनाव आयोग की मदद के नाम पर वोटर जागरूकता का काम दिया गया था। लेकिन, इस संस्था ने कथित तौर पर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के फर्जी आईडी कार्ड बनाए। वहीं घर-घर जाकर मतदाताओं का निजी डेटा (जाति, उम्र, लिंग, आधार नंबर) इकट्ठा किया। तब आरोप लगे थे कि इस डेटा का इस्तेमाल कर के हजारों अल्पसंख्यक और दलित वोटरों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। उस वक्त कांग्रेस ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" बताया था, लेकिन बीजेपी सरकार के दौरान पुलिस जांच धीमी गति से आगे बढ़ी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
इस खबर का सबसे बड़ा और धमाकेदार एंगल इसकी 'टाइमिंग' है। सवाल यह है कि सरकार बनने के एक साल बाद अचानक इस केस की याद क्यों आई? यहां मुडा (MUDA) का जवाब अहम है। सिद्धारमैया इस समय मुडा (MUDA) जमीन घोटाले में बुरी तरह फंसे हुए हैं। बीजेपी उन पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। ऐसे में, चिलुमे केस की फाइल खोलना बीजेपी को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति है।
पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दायर कर दी थी और वरिष्ठ नेताओं को सीधे तौर पर आरोपी नहीं बनाया था। सिद्धारमैया सरकार का मानना है कि पुलिस ने 'बड़ी मछलियों' को छोड़ दिया। अब SIT बनाने का मतलब साफ है-जांच की आंच अब सीधे पूर्व बीजेपी मंत्रियों और तत्कालीन सीएम ऑफिस तक पहुंचाई जाएगी।
कांग्रेस ने सन 2022 में सीधे तौर पर तत्कालीन बीजेपी मंत्री सी.एन. अश्वथ नारायण पर चिलुमे संस्था को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। अब एसआईटी जांच का दायरा सिर्फ एनजीओ के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। क्योंकि सिद्धारमैया ने संकेत दे दिए हैं कि इस "साजिश के सूत्रधारों" तक पहुंचना जरूरी है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कई बड़े बीजेपी नेताओं को समन और पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
यह कदम साफ तौर पर यह बताता है कि कर्नाटक में अब विकासात्मक राजनीति से ज्यादा 'फाइल वॉर' देखने को मिलेगी। बीजेपी जहां सिद्धारमैया को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेर रही है, वहीं सिद्धारमैया ने 'वोट चोरी' के भावनात्मक मुद्दे को फिर से जिंदा कर दिया है। सिद्धारमैया का संदेश साफ है-"अगर आप मुडा (MUDA) पर वार करेंगे, तो हम चिलुमे (Chilume) से पलटवार करेंगे।" यह जांच अब केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अगले सियासी रण में एक दूसरे को 'नंगा' करने का हथियार बन गई है।
Published on:
16 Feb 2026 07:35 pm
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