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बिलाड़ा में बिखरा है अनूठा इतिहास, संरक्षण के प्रयास जरूरी

मारवाड़ के समृद्ध इतिहास के रूप में बिलाड़ा के स्मारक एवं महलों का कोई सानी नहीं है। यहां आज भी आई माता मंदिर में जलने वाली केसर ज्योत आस्था व श्रद्धा का कारण बनी हुई है। डिंगड़ी माता की गुफा और मालवा के महाराजा हर्षवर्धन की बहन हर्षा का बनाया अनूठा देवल भी इतिहास की गवाही दे रहे हैं।

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बिलाड़ा में बिखरा है अनूठा इतिहास, संरक्षण के प्रयास जरूरी

बिलाड़ा में बिखरा है अनूठा इतिहास, संरक्षण के प्रयास जरूरी

बिलाड़ा (जोधपुर). मारवाड़ के समृद्ध इतिहास के रूप में बिलाड़ा के स्मारक एवं महलों का कोई सानी नहीं है। यहां आज भी आई माता मंदिर में जलने वाली केसर ज्योत आस्था व श्रद्धा का कारण बनी हुई है। डिंगड़ी माता की गुफा और मालवा के महाराजा हर्षवर्धन की बहन हर्षा का बनाया अनूठा देवल भी इतिहास की गवाही दे रहे हैं।

श्रीमद् भागवत के चौथे अध्याय में राजा बलि व उनकी ओर से किए गए महायज्ञ में इसका उल्लेख है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर यक्ष बली को यही छला था। बाद में इसी पावन स्थली से आइपंथ का विस्तार हुआ। यह दीगर है कि ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद संरक्षण को लेकर कोई विशेष प्रयास नहीं हो रहे हैं।

आई माता ने दिए उपदेश

कहते हैं कि इस नगरी की पावन धरा पर आई माता ने अपने मुखारविंद से लोगों को सदाचार, धर्म और कर्तव्य परायणता का उपदेश दिया और अंत में यहीं आलोपित होकर अखंड केसर ज्योत में प्रतिबिंबित हो रही है। इस घटना से पहले स्वयं आई माता ने श्रद्धालुओं को एकत्रित कर उनकीसाक्षी में दीवान की पदवी का प्रादुर्भाव किया। यहां दीवान परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।

गुफा जो जोधपुर किले तक है
बिलाड़ा नगरी के दक्षिण में डिंगड़ी माता की गुफा है। कहा जाता है कि यह गुफा जोधपुर के किले में माता भवानी के मंदिर की गुफा से जुड़ी है। जीवन पर्यंत बिना अन्न जल के निराहार रही सती माता रूप कंवर का आश्रम एवं उनके द्वारा बनवाया अद्भुत शिव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं को आज भी आमंत्रित करता है।