
brijbhushanlal kabra no more
जोधपुर . जोधपुर मूल के जाने-माने हवाईयन गिटारवादक बृजभूषणलाल काबरा का गुरुवार को अहमदाबाद में देहांत हो गया। वे अहमदाबाद में रहते थे। जोधपुर के मेड़ती गेट स्थित कुचामन हवेली में वर्ष 1937 में शिक्षाविद गोद्र्धनलाल काबरा के घर जन्मे बृजभूषणलाल काबरा दिलकश हवाईयन गिटारवादन के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हवाईयन गिटार को शास्त्रीय वाद्य की तरह बजा कर लोकप्रिय किया था। देश विदेश में उनके चाहने वाले प्रशंसकों की भारी तादाद है।
प्रयोगधर्मिता अपनी मिसाल आप
काबरा ने इसमें सितारवादन के पुट की जो प्रयोगधर्मिता की थी, वह अपनी मिसाल आप है। पंडित बृजभूषण काबरा का निधन होना संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है। जोधपुर के ही सितारवादक दामोदरलाल काबरा के अनुज बृजभूषण काबरा ने जोधपुर में शिक्षा दीक्षा ली। स्पोट्र्स में रुचि रखने वाले बृजभूषण ने जियोलॉजिस्ट की ट्रेनिंग प्राप्त की। लेकिन कोलकाता प्रवास के दौरान उन्होंने हवाईयन गिटार को लैप स्लाइड की तरह प्रयोग करते हुए क्लासिकल बजाना शुरू किया।
उस्ताद अली अकबर खां से संगीत की तालीम ली
उन्होंंने उस्ताद अली अकबर खां से बाकायदा संगीत की तालीम ली थी। सबसे पहले बांसुरी के शहंशाह पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी व संगीत शिरोमणि पंडित शिवकुमार शर्मा के संतूरवादन के साथ जुगलबंदी करते हुए 1967 में एलबम कॉल्स ऑफ वैली का निर्माण किया। बाद में चौरसिया व शर्मा ने तो पॉपुलर म्यूजिक अपना लिया, लेकिन काबरा ने शास्त्रीय संगीत नहीं छोड़ा। काबरा का यह शास्त्रीय संगीत प्रेम ही उनकी पंूजी थी। संगीतकारों और संगीत प्रेमी रसिक श्रोताओं को उनका यह अंदाज अच्छा लगता था।
मारवाड़ संगीत रत्न अवार्ड भी मिल चुका
उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी फै लोशिप, नेशनल संगीत अकादमी और गुजरात अकादमी ने इनामों से नवाजा था। वहीं स्वर सुधा और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की ओर से मारवाड़ संगीत रत्न अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने स्वर सुधा की ओर से जोधपुर में वर्ष १९८९ व १९९८ में आयोजित कार्यक्रम में तबला सम्राट जाकिर हुसैन के साथ जुगलबंदी की थी। ध्यान रहे कि हवाई गिटारवादक बृजभूषणलाल काबरा के पुत्र बसंत काबरा सरोदवादक हैं।
काबरा घराने का योगदान अभूतपूर्व
उल्लेखनीय है कि शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में काबरा घराने का योगदान विशिष्ट व उल्लेखनीय है। एक ओर जहां गोद्र्धनलाल काबरा ने जोधपुर में शिक्षा की अलख जगाई। काबरा अपने यहां शीर्ष साहित्यकारों और संगीतकारों की बैठकें करते थे और कुछ नया व प्रयोगधर्मिता करने की कोशिश करते थे। उन्होंने जोधपुर में रहने वाले मशहूर शाइर रमजी इटावी, संगीतकार क्षीरसागर परिवार और संगीतकार तबलावादक हरीशपुरी नागा को अपने साथ जोड़ कर कलात्मक कार्य करने की कार्ययोजना बनाई थी। वहीं गोद्र्धनलाल काबरा की संतान ने संगीत की इस विरासत को आगे बढ़ाया। दामोदरलाल काबरा, ब़ृजभूषणलाल काबरा और बसंत काबरा ने संगीत के क्षेत्र में पहचान बनाई है।
Published on:
13 Apr 2018 03:54 pm
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