
कैंसर का इलाज संभव, फंगल बेकाबू
जोधपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स जोधपुर) में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तत्वावधान में 13वीं नेशनल कांफ्रेंस ऑफ सोसायटी फॉर इंडियन ह्रूमन एंड माइकोलॉजिस्टस (सिहम-2020) के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में फंगल इंफेक्शन पर चर्चा की गई। विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि अस्पताल में आने वाले सौ मरीजों में से 10 को फंगल की शिकायत रहती है। कुछ विशेषज्ञों का मत था कि कैंसर का इलाज संभव हो गया है लेकिन फंगल इंफेक्शन अब भी बेकाबू है।
कार्यक्रम आयोजक माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर अनुराधा शर्मा ने बताया कि देश-विदेश से आए विशेषज्ञ वक्ताओं में डॉ. प्रतिभा काले, प्रो. डॉ. अनुपमा ज्योति, डॉ. ओलिवर, डॉ. सावित्री शर्मा, डॉ. निरंजन नायक, डॉ. ललिता, डॉ. जोन परफेक्ट, डॉ. बिट्रिज गोमेज भी शामिल थे।
इंडिया में आंखों का फंगल इंफेक्शन होने का सर्वाधिक खतरा
खेत में या घर में काम करते समय या टू व्हीलर वाहन चलाते समय भी फंगल आंखों में घुस जाती है। धूल, पेड़-पौधे व पानी तक में फंगस आ सकती है। हमारे देश का वातावरण फंगल के लिए अनुकूल है। जरूरी है कि आप हर समय चश्मा लगाए रखें। कई बार शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होने पर फंगस भारी पड़ जाती है। घर में भी सभी को अपना व्यक्तिगत तोलियां रखना चाहिए।
- डॉ. गायत्री शर्मा, हैदराबाद
कैंसर का इलाज संभव, फंगल इंफेक्शन बेकाबू
फंगल इंफेक्शन में पहले उसकी पहचान होनी जरूरी है। आवश्यक बात यह है कि इंफेक्शन का इलाज हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में इसकी जांच व इलाज की दरें सस्ती होनी चाहिए। रिसचर व एजुकेशनिस्ट के नाते कहना चाहूंगा कि अमरीका में न केवल इलाज की बेहतर सुविधाएं हैं बल्कि जटिल बीमारियों से बचाव के प्रयोग भी किए जा रहे हैं। कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज संभव हो चला है। लेकिन यहां फंगल इंफेक्शन तक को रोक पाना मुनासिब नहीं है।
- डॉ. जॉन परफेक्ट, यूएसए
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इंसानों की इम्यूनिटी कम होते ही फंगल इंफेक्शन हावी होता है
जानवरों में भी फंगल होता है, लेकिन जब इंसानों की इम्यूनिटी कम होती है तो उनमें भी आकर प्रभाव डालता है। इन सभी बातों पर कांफ्रेंस में चर्चा जारी है। मेरा मानना है कि इस कांफ्रेंस में माइकोलॉजी को लेकर सभी बेहद ज्ञान लेकर जाएंगे। इसमें भारत व विदेश से चिकित्सक भाग ले रहे है। एम्स जोधपुर को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
- डॉ. विजय लक्ष्मी नाग, एचओडी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एम्स जोधपुर
Published on:
13 Feb 2020 11:56 pm
