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जोधपुर के दईजर की गुफाओं का कोई नहीं जान पाया है रहस्य, भूलभुलैया में वैज्ञानिक भी उलझे

वैज्ञानिकों का कहना था कि गुफाओं में अंदर रोशनी और प्राणवायु की कमी होने के कारण इनके अंत की खोज नहीं की जा सकती।

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जोधपुर . सूर्यनगरी का इतिहास रहस्यों से भरा हुआ है। मंडोर क्षेत्र के दईजर स्थित प्राकृतिक गुफाएं मानवीय मस्तिष्क और विज्ञान के लिए अनसुलझी हैं। दईजर की पहाडिय़ों में गुफाओं की भूलभुलैया की प्रसिद्धि इतनी है कि दुनियाभर में चर्चा होती है। विदेशी वैज्ञानिक इन गुफाओं का रहस्य जानने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन आज तक पूर्ण रूप से इनके छोर का पता नहीं लगा पाए।
वैज्ञानिकों का कहना था कि गुफाओं में अंदर रोशनी और प्राणवायु की कमी होने के कारण इनके अंत की खोज नहीं की जा सकती।

गुफाओं के ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में प्रकट चामुंडा माता का मंदिर प्रमुख आस्था का केंद्र है। शताधिक महंत बालस्वरूप गिरी मंदिर की सारसंभाल कर रहे हैं। बताया जाता है कि उनके दादा गुरु सेवाराम दशकों पूर्व बेरी गंगा में पूजा-अर्चना के आए थे। इसके बाद उन्होंने इस स्थान की खोज की थी। तब से लेकर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है। प्रकट माता की मूर्ति के समीप ही चामुंडा और ब्रह्माणी माता की मूर्तियां हैं। सेवाराम की समाधि के दर्शन करने भी लोग आते हैं।

आस्था का प्रमुख केंद्र

दईजर की पहाडिय़ां मारवाड़ के लोगों के लिए आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है। अधिकमास में होने वाली भौगिशैल परिक्रमा सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में यहां मेले का माहौल रहता है। इतना ही नहीं, नवरात्र आदि अवसरों पर भी माता चामुंडा के साधक पूजा-अर्चना करते हैं। यहां से बहने वाले प्राकृतिक जलधारा के कारण घने वन हुआ करते थे। गुफाओं में हिंसक वन्यजीवों का निवास था। वन घटने के साथ ही प्राकृतिक जीवों की संख्या कम हो गई। यहां से बहने वाली प्राकृतिक जलधारा अब सूख गई है, जो अब सिर्फ बारिश के मौसम में देखने को मिलती है।

बनने लगा है पिकनिक स्पॉट

प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध दईजर पिकनिक स्पॉट के तौर पर जाना जाने लगा है। बरसात के मौसम में पहाडिय़ों से बहने वाले प्राकृतिक झरनों का आनंद लेने के लिए लोग दूरदराज से यहां आते हैं। भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण वाले इस क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य लुभावना है।

31 को होगी प्राण प्रतिष्ठा


दईजर स्थित इन प्राकृतिक गुफाओं में दैवीय आस्था को ध्यान में रखते हुए चामुण्डा माता की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा का आयोजन 31 मार्च को होगा। इससे पूर्व 26 मार्च से ही यहां विभिन्न हवन और पाठ सहित कई धार्मिक आयोजन होंगे।

इनका कहना है

मैं नवरात्र पूजन के लिए प्रतिवर्ष यहां आता हूं। यहां के शांत परिवेश और धार्मिक केंद्र होने के चलते विशेष आस्था है। गुफाओं का रहस्य लोगों के लिए कौतुहल का विषय है। हमें यहां के नैसर्गिक सौंदर्य को बरकरार रखने में सहयोग करना चाहिए।

चंद्रप्रकाश सोनी, श्रद्धालु