
अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्राथमिकता नहीं देने को चुनौती
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रतीन चिह्न आवंटन में प्राथमिकता नहीं दिए जाने के मामले में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ में याचिकाकर्ता जनता सेना राजस्थान की ओर से दायर याचिका में राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम १९९४ के नियम ५८ के उप नियम ६ व राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी राजस्थान जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य निर्वाचन प्रतीक (सूची व आवंटन) आदेश २०१९ की अधिसूचना २६ अप्रैल, २०१९ को चुनौती दी गई है। अधिवक्ता सज्जनसिंह राठौड़ ने कहा कि दोनों ही नियमों व अधिसूचना में याची जैसे अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए कोई प्रावधान नहीं है, जबकि भारत चुनाव आयोग द्वारा पंजीकरण करते हुए सभी अमान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों को निर्दलीय उमीदवारों से ऊपर वरीयता दिए जाने का प्रावधान है। चुनाव चिह्न (आरक्षण व आवंटन) आदेश १९६८ में इस संबंध में उल्लेख है। इसी तरह एक अन्य याचिका में राजस्थान नगर पालिका (निर्वाचन) नियम १९९४ के नियम २० व राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी राजस्थान नगर पालिका निर्वाचन प्रतीक (सदस्य पद के निर्वाचन के लिए सूची और आवंटन) आदेश २०१९ की अधिसूचना २ अप्रैल, २०१९ को भी चुनौती दी गई है। कोर्ट ने सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल एवं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से विकास बालिया को याचिकाओं की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश देते हुए २८ सितंबर को अगली सुनवाई मुकर्रर की है।
Published on:
15 Sept 2020 08:43 pm
