Chipko Movement खेजड़ली शहीदों की याद में जेडीए ने करवाया था निर्माण, प्री मानसून पहली ही बारिश नहीं झेल सका, जेडीए ने माना आर्किटेक्चर खामी और कमेटी गठित
खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अमृता देवी बिश्नोई Amrita Devi Bishnoi सहित शहीद हुए 363 लोगों के सम्मान में खड़ा किया गया पैनोरमा एक बारिश भी नहीं झेल सका। अभी पांच माह पहले ही इस पैनोरमा को JDA Jodhpur ने बनवाया था, लेकिन इसमें Architectural खामी रहने के बाद पैनोरमा में शहीदों के नाम अंकित सभी पत्थर ढह गए।
CM Ashok Gehlot की बजट घोषणा की पालना में करीब पांच माह पहले 45 लाख की लागत में पैनोरमा बन कर तैयार हुआ था। इसमें Khejadli Shaheed Smarak पर मुख्य मूर्ति के आस-पास गोलाकार में पत्थर लगाकर सभी शहीदों के नाम अंकित किए गए थे। इसमें लाइटिंग व अन्य व्यवस्था भी की गई। सभी 363 शहीदों के बारे में आने वाली पीढ़ी जाने इसलिए यह पहल हुई, लेकिन शहीदों को मिला यह सम्मान बीती रात आई बारिश में ढह गया। इसमें घटिया निर्माण व खराब आर्किटेक्चर को कारण बताया जा रहा है।
क्या कहता है जेडीए
जेडीए ने यह कार्य करवाया था। इसमें अब तक निर्माण सामग्री में दो दोष नहीं माना, लेकिन जिसने पूरे प्रोजेक्ट का आर्किटेक्ट किया तो उसे तलब किया है। शहीद स्मारक में जिन पत्थरों पर शहीदों के नाम अंकित थे, उनके बीच का स्थान व बेस की डिजाइन में तकनीकी खामी है।
फैक्ट फाइल
- 292 साल पहले चिपको आंदोलन हुआ था खेजड़ली गांव में
- 363 शहीद हो गए थे तब खेजड़ली में
- 45 लाख में हुआ था पैनोरमा का काम
- 5 माह पहले ही पूरा हुआ है काम
यह है चिपको आंदोलन का इतिहास
यह बात वर्ष 1730 की है, जब खेजड़ली गांव में राज सैनिक खेजड़ी पेड़ को काटने के लिए आए थे। गांव में अमृता देवी बिश्नोई और उनकी तीन बेटियों को इस बारे में जानकारी मिली। उन्होंने सैनिकों को रोकना चाहा, लेकिन नहीं रुके। इसके बाद वे पेड़ से चिपक गई और सैनिकों ने पेड़ों के साथ उनको भी काट दिया, इसके बाद गांव के 363 लोग भी इसी प्रकार पेड़ों से चिपक कर शहीद हो गए थे।
इनका कहना...
मैंने खुद खेजड़ली पैनोरमा स्थल का निरीक्षण किया है। एक जांच कमेटी बनाई है और प्रथम दृष्टया आर्किटेक्चरल खामी पाई गई है। जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंच कर कार्रवाई करेंगे।
- इंद्रजीत यादव, आयुक्त, जेडीए जोधपुर