
मुआवजे में खर्च हो रहा ‘विकास’ का पैसा
जोधपुर।
प्रदेश में खानधारकों से डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के नाम से फ ण्ड इक_ा करने के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है। राज्य सरकार ने 2016 से डीएमएफ टी का गठन किया था। जिस उद्देश्य से ट्रस्ट का गठन किया गया था, वह उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। ट्रस्ट में जमा फण्ड की राशि सिलिकोसिस पीडि़तों को दी जाने वाली सहायाता राशि या मुआवजे के भुगतान में खर्च की जा रही है। प्रत्येक खानधारक से रॉयल्टी के अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि विकास के रूप में वसूल की जा रही है। यह राशि डीएमएफटी में जमा होती है ---
पूरा फण्ड मुआवजे में
डीएमएफटी के गठन का उद्देश्य प्रत्येक खानधारक से जमा राशि खानों के विकास व आसपास के क्षेत्रों में जनपयोगी कार्यो को कराना था। जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, सडक़, पर्यावरण व अन्य विकास कार्यो पर राशि करने का प्रावधान था। लेकिन इसके विपरीत जितना पैसा डीएमएफ टी से आ रहा है। वह पूरा पैसा सिलिकोसिस पीडि़तो को मुआवजे के रूप में वितरण किया जा रहा है।
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अभी भी 1500 को भुगतान बाकी
डीएमएफटी के तहत अभी भी 1596 पीडि़तों को मुआवजा देना बाकी है। इसके लिए करीब 30 करोड़ रुपए फण्ड की आवश्यकता है। वर्तमान में डीएमएफटी में फण्ड नहीं है। सिलिकोसिस पीडि़त को 2 लाख रुपए व मृतक आश्रित को 3 लाख रुपए का मुआवजा मिलता है।
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मुख्य सचिव ने भी दिए आदेश
मुख्य सचिव ने वर्ष 2018 में एक आदेश जारी किया था कि डीएफएफटी की गर्वनिंग काउंसिल की बैठक आयोजित किए बिना सिलिकोसिस पीडि़तों को प्राथमिकता से डीएफएफटी फण्ड से समय पर अनुदान वितरित किया जाए, जबकि नियमानुसार उनका सर्वे करवा कर राशि वितरित की जानी चाहिए।
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डीएमएफटी में जमा राशि (लाखों में)
वर्ष------------ राशि
2016-17-- 88.69
2017-18-- 572.09
2018-19-- 1356.30
1 अप्रेल से 30 सितम्बर 2019 तक---- 597.35
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सरकार का निर्देश है कि डीएफएफटी फण्ड से प्राथमिकता से सिलिकोसिस पीडि़तों को भुगतान किया जाए।डीएमएफटी का अधिकांश पैसा सिलिकोसिस पीडि़तों को मुआवजा देने में ही उपयोग किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर व सदस्य सचिव
डीएमएफटी
Published on:
10 Dec 2019 03:00 am
