
Jodhpur, adventure, divang, Para gliding
जोधपुर. बुलंद हौसला मौजों के पार उतर गए, डूबे वही जिनके इरादे बदल गए। नियति ने तो उसे बैठाए रखने के लिए मजबूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते हैं वे मुश्किलों से नहीं डरते, उनके आगे सफलता को भी झुकना पड़ता है। इन्हीं बातों को सही साबित कर रहे हैं शहर के दिव्यांग जगदीश लोहार। उन्होंने यह साबित किया है कि उनके बुलंद हौसलों के आगे निशक्तता और मुसीबतें बहुत कमजोर हैं और इंसान का हौसला ही उसमें जीने की कला व जज्बा जगाता है।
लोहार ने विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखने कासंदेश देते हुए दिव्यागों के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर ध्यान आकर्षित कराया और इसी के उद्देश्य से हवा में दो हजार फीट की ऊंचाई पर पैरा ग्लाइडिंग का साहसिक कार्य कर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया। पेशे से केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक जगदीश लोहार ने यह हैरतअंगेज कार्यक्रम जोधपुर से ५८ किलोमीटर दूर जैसेलमेर रोड पर अगोलाई के पास किया।
प्रशिक्षक ने एेसा किया इंतजाम
प्रशिक्षक समर्थ शर्मा के बारे में लोहार ने बताया कि पैराग्लाइडिंग की शुरुआत में और उतरते समय कुछ देर दौडऩा पड़ता है, लेकिन प्रशिक्षक समर्थ शर्मा ने कुछ एेसा प्रबंध किया कि दौडऩे की जरूरत ही ना पड़े।
जिन्दादिल हैं जगदीश
प्रशिक्षक समर्थ शर्मा ने कहा कि एक सामान्य इंसान इस तरह की साहसिक गतिविधयों में हिस्सा लेने से पहले एक बार विचार करता है। लोहार एक दिव्यांग होते हुए भी वो बहुत साहसी और जिंदादिल इंसान हैं। वे लोहार के जज्बे के कायल हैं।
साहस का सफल प्रयास और प्रदर्शन
बहादुर लोहार का पैराग्लाइडिंग में यह दूसरा सफल प्रयास है। इससे पहले उन्होंने प्रशिक्षण के तौर पर इस तरह का प्रयासकिया है। उनका कहना है कि पैराग्लाइडिंग का अनुभव बड़ा रोचक और साहस भर देने वाला था। यह अनुभव कभी भुला नहीं पाऊंगा। लोहार ने २०१३ में साहसिक प्रदर्शन करते हुए जोधपुर से लेह क्षेत्र तक १८०० किमी. की प्रेरणा यात्रा ट्राईस्कू टर से पूरी की थी। एेसा कर उन्होने अन्य आम लोगों और दिव्यागों में अनूठे जज्बे का संचार करने का प्रयास किया था। खास बात यह है विपरीत परिस्थितिओं में भी लोहार के चेहरे पर मुस्कुराहट रहती है, जो अपने आप में एक अनूठा संदेश देती है।
Published on:
29 Aug 2017 03:21 pm

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