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रूप चतुर्दशी आज: घर-परिवार की खुशहाली व समृद्धि के लिए देहरी पर होगा यम दीपदान

रूप चतुर्दशी की तैयारियों को लेकर महिलाओं में उत्साह

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Roop chaudas

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पांच दिवसीय पंच महापर्व के प्रथम पर्व धनतेरस का सूर्यनगरीवासियों ने परम्परागत खरीदारी से स्वागत किया। प्रदोषकाल में घर आंगन के कंवळे दीपदान से रोशन करने के बाद महालक्ष्मी-कुबेर का पूजन किया गया। घर परिवार में सुख समृद्धि व अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए पुष्प अक्षत से पूजन कर देहरी पर यम दीपदान किया गया। समुद्र मंथन के बाद आरोग्यवद्र्धक अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वन्तरि की पूजा कर समृद्धि व आरोग्य रूपी धन की 'मंगलÓ कामना की गई। परम्परागत खरीद के अबूझ मुहूर्त धनतेरस की शाम रोशनी से सराबोर बाजारों में खरीदारों का हुजूम उमड़ा। सुबह से रात तक शुभ मुहूर्त के चलते सूर्यनगरी के सभी प्रमुख बाजार खरीदारों से अटे नजर आए। सूर्यनगरी सहित मारवाड़ के विभिन्न अंचलों व आसपास के कस्बों से पहुंचे लोगों ने दीपोत्सव के साथ आगामी सावों के लिए भी जम कर खरीदारी की। शहर के सभी प्रमुख बाजारों में सुबह से ही आरंभ हुआ खरीदारी का दौर देर रात तक चलता रहा।

आज सोलह शृंगार के बाद होंगे कंवळे रोशन


पंचपर्व का दूसरा दिन रूप चतुर्दशी बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं दरिद्रता निवारण के लिए सूर्योदय से पूर्व उठ कर घर आंगन की स्वच्छता की परम्परा का निर्वाह करेंगी। प्रदोष वेळा में सोलह शृंगार कर घरों के कंवळे रोशन कर दरिद्रता व संकट नाश के लिए सौंदर्य रूप भगवान कृष्ण व महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। नरक चतुर्दशी पर घर-परिवार की खुशहाली व समृद्धि के लिए घर की देहरी पर यम दीपदान भी होगा।

वहीं मधुवन शिक्षण सेवा एवं विकास संस्थान की ओर से संचालित मधुवन आयुर्वेद नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र में मंगलवार को धनवन्तरि जयंती और राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया गया। संस्थान के आशुतोष दाधीच ने बताया कि मुख्य अतिथि संस्थान सचिव राजेन्द्र प्रसाद ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भगवान धनवन्तरि आयुर्वेद शास्त्र के जनक हैं और धनतेरस के दिन उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। आयुर्वेद केन्द्र के वैद्य इन्द्रनारायण चांदावत ने बताया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीनतम कलाओं में से एक है। कार्यक्रम में वैद्य धर्म महावीर सिंह, वैद्य निकिता पंवार, वैद्य युगल किशोर, वैद्य अख्तर परवेज, संतोष दाधीच, डॉ. एनके द्विवेदी एवं डॉ. शुभा दाधीच उपस्थित थे।