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जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में डॉ. गुलाबसिंह चौहान बने कुलपति

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में डॉ. गुलाबसिंह चौहान को विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। उन्होंने दोपहर में कार्यभार संभाल लिया। विश्वविद्यालय और राजनीतिक हलकों में माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गया।

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जोधपुर

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MI Zahir

Oct 06, 2018

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में डॉ. गुलाबसिंह चौहान को विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। उन्होंने दोपहर में कार्यभार संभाल लिया। विश्वविद्यालय और राजनीतिक हलकों में माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गया। जोधपुर में छात्र संघ अध्यक्ष विवादों के बीच राज्य सरकार ने लंबे समय से खाली चल रहे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय कुलपति पद पर नियुक्ति कर दी है।

पदभार संभाल लिया

डॉ. गुलाबसिंह चौहान को विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। जबकि पूर्व में जोधपुर के इसी विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ आर पी सिंह को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। डॉ. चौहान ने पदभार संभाल लिया है। डॉ. चौहान के कुलपति बनते ही विश्वविद्यालय के शिक्षकों, भाजपा नेताओं और छात्र नेताओं ने उन्हें मालाआे से लाद दिया।

विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेता
चौहान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि से हैं और विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेता रहे हैं। वे सिंडिकेट और एकेडमिक कौंसिल की मीटिंगों में भी मुद्दे उठाते रहे हैं। राजनीतिक तौर पर भी उनका जनाधार है। चौहान की नियुक्त एेसे समय हुई है जब एनएसयूआई के टिकट पर छात्र संघ चुनाव जीते सुनील चौधरी और एबीवीपी के टिकट पर चुनाव हारे मूलसिंह सेतरावा के बीच विवाद चल रहा है और यह विवाद जातिगत और राजनीतिक रूप ले चुका है। हाल ही में राजपूत समाज ने मूलसिंह के समर्थन में आक्रोश रैली निकाली थी और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने कार्यवाहक कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा से कुलपति कार्यालय में काफी देर बहस की थी। इसके बाद शर्मा ने कहा था कि मैं जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करूंगा और विधिक राय के बाद ही फैसला लूंगा। अब डॉ. चौहान की नियुक्ति से विश्वविद्यालय में इस समस्या का समाधान होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। विश्वविद्यालय को कुलपति मिलने से शिक्षकों और छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। शिक्षक भर्ती में घोटाले के बाद यूनिवर्सिटी की बहुत बदनामी हुई थी और यूनिवर्सिटी कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले पा रहा था।