
सोनम वागंचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि, पत्रिका फाइल फोटो
जोधपुर। लद्दाख के लेह में हिंसा के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जोधपुर जेल में बंद सोशल वर्कर सोनम वांगचुक चींटियों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर कुछ प्रयोग करने को उत्सुक हैं। वे जेल की बैरक को मौसम के अनुकूल गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म बनाना चाहते हैं। इसका खुलासा वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंगमो ने किया है। गीतांजलि समय-समय पर वांगुचक से मिलने जेल में आती है।
दरअसल, लेह के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रासुका के तहत पिछले साल 26 सितंबर को जोधपुर जेल में बंद किया गया था। तब से वो जोधपुर जेल में ही बंद हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि एंगमो ने गत दिनों जोधपुर जेल में बंद पति वांगचुक से मुलाकात की थी। गीतांजलि ने वांगचुक के बड़े भाई की ओर से भेजी चींटियों के संघर्ष पर लिखित किताब दी।
इसके साथ ही उन्हें जलवायु परिवर्तन व इनके संभावित समाधानों के बारे में लिखित किताबें भी सौंपी गईं। गीतांजलि वांगचुक ने इस संबंध में अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट करके जानकारी दी। गीतांजलि ने लिखा कि उन्होंने जेल में थर्मामीटर व अन्य उपकरण की जरूरत बताई है ताकि वे पर्यावरण के अनुकूल वास्तुकला पर सरल प्रयोग सके। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जेल प्रशासन से इस संबंध में पता किया जाएगा कि उन्हें थर्मामीटर व अन्य उपकरण दिए जा सकते हैं या नहीं?
शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल में बंद हैं। उन्हें बीते साल सितंबर महीने में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था। लद्दाख को संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर सोनम वांगचुक प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी।
तब से सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत मामला दर्ज कर सुरक्षा कारणों से जोधपुर जेल में शिफ्ट किया गया है।
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Published on:
25 Jan 2026 08:20 am
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