
Heart Disease: जयपुर। प्रदेश में बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की समय रहते पहचान और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य भवन में आयोजित हितधारकों की बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेशभर में चाइल्ड हार्ट डिजीज रजिस्ट्री, रीजनल सीएचडी हब और टू-डी ईको सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य हर बच्चे तक समय पर जांच, उपचार और नियमित फॉलोअप पहुंचाना है।
मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. अमित यादव ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और राज्य सरकार की योजनाओं के जरिए नवजातों और बच्चों में हृदय रोग के इलाज को मजबूत किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 468 बच्चों का दवाइयों से इलाज और 355 बच्चों की सर्जरी की गई। वहीं 2025-26 में दिसंबर तक 262 बच्चों को दवा और 304 बच्चों को सर्जरी सुविधा मिली। यह आँकड़े बताते हैं कि सही समय पर इलाज से कई मासूम जिंदगियां बचाई जा रही हैं।
अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि बच्चों में जन्मजात हृदय विकृति की शीघ्र पहचान बेहद जरूरी है। इसके लिए गांवों से लेकर बड़े शहरों तक रेफरल नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। हाल ही में जेके लोन अस्पताल में 20 करोड़ की लागत से सीवीटीएस सर्जरी यूनिट शुरू की गई है, जहां अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध है। भविष्य में अन्य अस्पतालों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
विशेषज्ञों ने माता-पिता से अपील की कि बच्चों में सांस फूलना, नीला पड़ना, बार-बार बीमार होना या वजन न बढ़ना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जागरूकता ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
बैठक में चिल्ड्रन हार्ट लिंक संस्था के भारत व अमेरिका के प्रतिनिधियों ने केरल और अन्य देशों के सफल मॉडल साझा किए। प्रतिनिधि बिस्त्रा झेलेवा ने विजन 2040 के तहत पॉपुलेशन आधारित एप्रोच अपनाने की जरूरत बताई। इससे हर बच्चे की स्क्रीनिंग और उपचार की निगरानी संभव होगी।
Updated on:
24 Jan 2026 10:56 pm
Published on:
24 Jan 2026 10:52 pm
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