जोधपुर. हर छोटी मोटी शरारत के बाद संवाद- म्हें तो थारो खास भायलो हूं नी? ये और एेसे कई भावपूर्ण चुटीले संवादों से अदाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। यहां राजस्थानी संस्कृति से सजी माटी की सुवास थी तो कलाकारों ने मायड़ में संवाद अदायगी से दिल जीत लिया। यह बीकानेर के अनुराग कला केंद्र की पेशकश का नजारा था। स्व. निर्मोही व्यास लिखित व सुधेश व्यास निर्देशित राजस्थानी नाटक भोळो भैरू ( Bholo bhairu )
हास्य नाटक का बुधवार शाम टाउन हॉल में भावपूर्ण मंचन किया गया। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर ( rajasthan sangeet drama academy jodhpur) और पश्चिम क्षेत्र संास्कृतिक केन्द्र उदयपुर ( west zone cultural centre udaipur ) की साझा मेजबानी में आयोजित चार दिवसीय बहुभाषीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन मंचित इस नाटक में मधुर गीत संगीत के संग भोपा भोपी की राजस्थानी लोक कथा मंच पर साकार हुई। इस दौरान कभी मरु लोक महोत्सव तो कभी कठपुतली खेल देख दर्शकों कीे हंसी की फुलझडि़यां छूट पड़ीं। ध्यान रहे कि सुधेश व्यास हमीदाबाई की कोठी और मायावी सरोवर,पराजित, भीखो ढोली, पीला गुलाब और मैं, रिश्ता, पियानो बिकाऊ है और आठवां फेरा जैसे नाटकों के निर्देशन और सखाराम बाइंडर,महाभोज और थैंक्यू मिस्टर ग्लॉड और जो राम रचि राखा नाटकों में अदाकारी के लिए जाने जाते हैं।
मंच पर और पर्दें के पीछे
मंच पर भोपा की भूमिका में सुनील जोशी, भोपी के किरदार में भगवती वामी, भैरयो के पात्र में अशोक व्यास और काळियो के तौर पर कसन रंगा ने अभिनय किया। जबकि पुजारी और पानी वाला के रूप में सुर स्वामी, ग्रामीण की भूमिका में विकास शर्मा, गुंडा के रूप में सुमित मोहिल और गूंगा की भूमिका में ठाकुरदास स्वामी ने अदाकारी की। वहीं राजे झुंझ के संगीत निर्देशन में सीमासिंह ने मधुर गायन और पल्लवीसिंह पंवार ने आकर्षक चकरी नृत्य किया। जबकि कोरस में ठाकुरदास स्वामी और सीमासिंह ने साथ निभाया।