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नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अवैध खनन पर राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या अरावली पहाडि़यों को हनुमान जी उठा ले गए, लेकिन जोधपुर की जिन पहाडि़यों पर बड़ी संख्या में हनुमान लंगूरों का वास है, उन्हें अतिक्रमी चट कर रहे हैं। यहां नागौरीगेट के बाहर कागा स्थित शीतला मंदिर से सटी पहाडि़यों का लगातार सफाया हो रहा है। वन क्षेत्र की इन पहाडि़यों पर हनुमान लंगूरों का प्राकृतवास है। जो पहाडि़यों के सफाया होने से खत्म हो रहा है। भोगिशैल महत्व की इन पहाडि़यों का कोई धणी धोरी नहीं होने के कारण हजारों की संख्या में पहले ही अतिक्रमण हो चुके हैं और अब बची कुची पहाडि़यों को भी खत्म किया जा रहा है।
कागा की पहाडि़यों का सफाया करने से क्षेत्र के एेतिहासिक शीतला माता मंदिर तक पहुंचने वाली पानी की पाइप लाइन को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा चुका है। शीतला माता (कागा तीर्थ) ट्रस्ट के अध्यक्ष माधोसिंह कच्छवाह ने बताया कि बड़ी मुश्किलों के बाद मंदिर तक पानी की पाइप लाइन बिछाई गई थी लेकिन इन दिनों कागा की पहाडि़यों की अंधाधुंध कटाई के कारण छह इंच की पाइप लाइन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इस बारे में जब पीचईडी के अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने इसकी जानकारी नहीं होना कहकर पल्ला झाड़ दिया। माइनिंग, रेवेन्यू अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। पहाड़ी का अधिकांश हिस्सा वन क्षेत्र में होने के कारण जब शीर्ष वन अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने मौका मुआयना करने के लिए मंडोर रेंज के अधिकारियों को भेजा। लेकिन वन अधिकारी भी लीपापोती कर रहे हैं।
500 से अधिक हेक्टेयर की पहाडि़यों का खात्मा
जोधपुर शहर की सीमा में सात वनखंडों में करीब 25 हजार से अधिक कब्जों से 500 हेक्टेयर से अधिक चट्टानों का विनाश हो चुका है। पहाडि़यों व चट्टानों का सफाया कर पर्यावरण विनाश लीला का खेल शहर में जगह-जगह आज भी खुले आम चल रहा है।
कागजी बन गई पर्यावरण समिति की बैठक
पर्यावरण को बचाने के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता वाली जिला पर्यावरण समिति की बैठक भी एक दशक से कागजी रह गई है। जोधपुर की वनभूमि पर अंधाधुंध अतिक्रमण बढऩे के बावजूद समिति की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
इस तरह हो रहा पहाडि़यों का खात्मा
- भूतेश्वर वन क्षेत्र में सर्वाधिक 3 हजार कब्जे हो चुके हैं। इस वन खंड की 184.76 हेक्टेयर जमीन पर करीब एक दर्जन बस्तियांे पर आज भी अतिक्रमण का सिलसिला बदस्तूर जारी।
- प्रतापनगर श्मशान की पहाडिय़ों को भी बनाया निशाना।
- भू माफिया बेच रहे वनविभाग की चट्टानी जमीनें।
भू माफियाओं की लगी नजर, बना दी 500 करोड़ की मार्केट वैल्यू
शहर के न्यू पॉवर हाउस, एम्स रोड व न्यू पाली रोड के वनक्षेत्र व्यास की बावड़ी वनखंड, सिवांचीगेट श्मशान व प्रतापनगर की पहाडि़यों वाला भूतेश्वर वनक्षेत्र, सूरसागर मंडोर रोड और किला रोड विद्याशाला रोड स्थित देवकुण्ड वन क्षेत्र, लाल सागर संतोषी माता मंदिर से सटा वन क्षेत्र, चांदना भाखर का सम्पूर्ण क्षेत्र, माचिया जैविक उद्यान के सुरक्षा दीवार का आसपास का क्षेत्र, सूथला चौपासनी रोड से सटा बड़ा भाखर वन क्षेत्र और मंडोर क्षेत्र के बेरीगंगा वन क्षेत्र में 500 से भी अधिक हेक्टेयर की पहाडि़यों का सफाया। इस भूमि की मार्केट वैल्यू वर्तमान में 500 करोड़ से भी अधिक है।
जोधपुर वनभूमि : एक नजर में
कुल वन क्षेत्र-23664.51 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन क्षेत्र-10619.95
राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम से वंचित-13७५०. ७८ हेक्टेयर
शिकायत मिली है
मुझे कागा की पहाडि़यों का सफाया करने की शिकायत मिलने पर वनकर्मी को मौके पर भेजा था। वनविभाग का सर्वेयर इन दिनों छुट्टी पर है। कल ही मंडोर रेंज के रेंजर और हल्का पटवारी को भेजकर मामले का पूरा पता करवाता हूं।
हनुमानाराम चौधरी, उपवन संरक्षक जोधपुर
पहाडि़यां हमारी लाइफ लाइन
मंडोर रेंज में वनभूमि की पहाडि़यों पर अंधाधुंध खनन और वनभूमि पर अतिक्रमण को लेकर लंबे अर्से से कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। जोधपुर की लाइफ लाइन माने जाने वाली पहाडि़यां हमारी विरासत है। वन्यजीवों का प्राकृतवास है। इनका सफाया पिछले दो दशक से लगातार जारी है। लेकिन मिलीभगत के खेल में कोई बोलने वाला नहीं है।
रामजी व्यास, पर्यावरणविद् जोधपुर
Published on:
25 Oct 2018 10:39 am

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