30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाईकोर्ट में कैंटीन दिलाने का झांसा देकर 15 लाख रुपए ऐंठे

- अधिवक्ता बन मॉल में ऑफिस खरीदने के बहाने सम्पर्क कर झांसे में लिया- चार साल तक टालमटोल के बाद पीडि़त ने आरोपी के खिलाफ दर्ज कराई एफआइआर

2 min read
Google source verification
हाईकोर्ट में कैंटीन दिलाने का झांसा देकर 15 लाख रुपए ऐंठे

हाईकोर्ट में कैंटीन दिलाने का झांसा देकर 15 लाख रुपए ऐंठे

जोधपुर।
न्यू हाईकोर्ट में कैंटीन कैफेटेरिया लीज पर दिलाने का झांसा देकर अधिवक्ता बने एक व्यक्ति ने 15 लाख रुपए ऐंठ लिए। कैंटीन का कार्य किसी अन्य को मिलने व चार साल तक टालमटोल के बाद पीडि़त ने बासनी थाने में एफआइआर दर्ज करवाई।
पुलिस के अनुसार रातानाडा में सुभाष चौक निवासी सोहित पुत्र इन्दाराम चौधरी ने कोर्ट में पेश इस्तगासे के आधार पर मूलत: मथानिया हाल बीजेएस निवासी मूलसिंह पुत्र शंकरदान चारण के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि सोहित की पाली रोड पर शताब्दी सर्कल के पास मॉल में मार्केटिंग चैनल में साझेदार था। दिसम्बर 2018 में मूलसिंह पीडि़त से मिला और खुद को अधिवक्ता बताते हुए ऑफिस के लिए मॉल में जगह के बारे में बात की थी। इसके बाद दोनों में सम्पर्क बढ़ा। दोनों रामपुरा में फार्म हाउस पर मिलने लगे, जहां आरोपी ने उसे अवगत कराया कि हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों से उसका अच्छा सम्पर्क है। वह उसे न्यू हाईकोर्ट में कैंटीन लीज पर दिला देगा। बदले में 15 लाख रुपए लगेंगे। नवम्बर 2019 में बासनी में सालावास रोड पर निजी अस्पताल के बाहर एसयूवी में पीडि़त ने उसे 15 लाख रुपए दे दिए थे। आरोपी चार-पांच माह में कैंटीन दिलाने का भरोसा दिलाया था।
कुछ महीने बाद मार्च 2020 में लॉक डाउन लग गया था। पीडि़त के सम्पर्क करने पर वह लॉक डाउन बताकर टालमटोल करता रहा। लॉक डाउन के बाद पीडि़त ने उस पर दबाव बनाना शुरू किया। गत मार्च में आरोपी उससे मिला और कैंटीन लीज पर दिलाने का कार्य अंतिम चरण में होने का बता दस्तावेज व फोटो लिए थे। कुछ दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर भी कराए थे। अगस्त तक काम न होने पर वह आरोपी के घर पहुंचा, लेकिन घरवाले उसके घर पर न होने का बहाना बनाते रहे। संदेह होने पर पीडि़त ने आरोपी के बारे में जानकारी जुटाई तो ठगी होने का पता लगा। हाईकोर्ट में कैंटीन भी किसी अन्य को देने का पता लग गया था। तब वह थाने पहुंचा और लिखित शिकायत दी, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। अब पीडि़त ने कोर्ट से मामला दर्ज कराया है।

Story Loader