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किसानों को बताई कम लागत में अधिक उपज लेने की तकनीकें

पत्रिका न्यूज नेटवर्कफलोदी. कृषि विज्ञान केन्द्र फलोदी व कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के तत्वावधान में बुधवार को कृषि विज्ञान केन्द्र में जल शक्ति अभियान के तहत किसान मेले का आयोजन किया गया।

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फलोदी. कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित किसान मेले में उपस्थित लोग।

फलोदी. कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित किसान मेले में उपस्थित लोग।


किसान मेले में फसल उत्पादन के लिए जल बचत तकनीकों जैसे सूक्ष्म सिंचाई पद्धति, फव्वारा पद्धति, बून्द-बून्द सिंचाई पद्धति, जैविक खेती, स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित विविध उत्पादों का प्रदर्शन व 12 से अधिक कंपनियों ने अपने अपने स्टॉल के माध्यम से जल बचत की तकनीकों एवं कृषि उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक पब्बाराम विश्नोई, विशिष्ठ अतिथि जानकीलाल शर्मा, पार्षद रमेश थानवी, दूसरा दशक परियोजना निदेशक मुरारीलाल थानवी रहे। विधायक पब्बाराम विश्नोई ने किसानों को जल बचत, वर्षा के पानी का संग्रहण, जैविक खेती व पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने कहा किकिसान अनावश्यक खेती खर्च से बचें व कम खर्च में अधिक उत्पादन प्राप्त करें। कृषि विज्ञान केन्द्र फलोदी के अध्यक्ष डॉ. एम.एस. चांदावत ने कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से कम पानी में भी अधिक उत्पादन की जानकारी दी तथा बाजरे की उन्नत किस्म एम.पी.एच.-17 मोठ, मूंग तथा तिल जैसी फसलों की उन्नत किस्मों को अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसान कम पानी की जरूरत वाली फसलों का उत्पादन करें। उन्होंने किसानों को हर मेड पर पेड तथा खेत का पानी गांव में पर जोर दिया। जिससे किसान कम पानी व कम लागत में अधिकतम तथा अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। रमेश थानवी ने कहा कि इस क्षेत्र के किसान समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर कम पानी, कम वर्षा की स्थिति में भी एक निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. गजानन्द नागल ने रोग एवं कीटों के जैविक प्रबंधन की विभिन्न विधियों तथा जैविक कारकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बूंद-बूंद सिंचाई की सहायता से पौधों को उपयुक्त जैविक कीटनाशी एवं फफंूदनाशी की आपूर्ति उचित ढंग से पर्याप्त जल में की जा सकती है। साथ ही विभिन्न फसलों में दीमक व गोजा लट नियंत्रण के रोकथाम हेतु उपाय बताए। सस्य वैज्ञानिक डॉ. एम.एम. पूनिया ने खरीफ तथा रबी फसलों में जल के उचित प्रबंधन के लिए फसल योजना तैयार करना, उन फसलों की किस्मों का चुनाव और उन्नत सिंचाई तकनीकों का प्रयोग, फव्वारा व बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति का उपयोग करने की विस्तृत जानकारी दी। प्रगतिशील किसान किसना राम, भीख सिंह ने अधिक उत्पादन तथा अधिक मुनाफा लेने तथा आय दुगुनी करने के बारे में अपना अनुभव उपस्थित किसानों के साथ साझा किए। कार्यक्रम से पहले स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रभात फेरी द्वारा जल बचत एवं इसकी उपयोगिता पर रैली निकाल कर ग्रामीणों को जागरूक किया। किसान मेले में विभिन्न कंपनियों ने टेक्नॉलोजी का जीवंत प्रदर्शन किया तथा किसानों ने अवलोकन किया। कार्यक्रम में फार्म मैनेजर रतनलाल जीतरवाल, लैब तकनीशियन भागचंद ओला, आशुलिपिक योगेश्वर शर्मा, सवाई सिंह सहित फलोदी, नौसर, भोजकां, जागरियां, पीलवा, बरजासर, दयांकोर, खारा, देणोक, भाखरियां, शेखासर, मोहरां, कालीमाली आमला, ओसियां, पल्ली आदि गांवों के किसानों व कृषक महिलाओं ने भाग लिया। (कासं)-------------------