
कांगो फीवर रोगियों के इलाज को लेकर एम्स और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के बीच ठनी, रोगी को माना जा रहा संदिग्ध
abhishek bissa/जोधपुर. जोधपुर में मिले क्रिमियन कांगो हैमरेजिक फीवर (सीसीएचएफ) के संदिग्ध रोगियों के इलाज को लेकर जोधपुर एम्स और और डॉ. एसएन माथुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच विवाद हो गया है। एम्स कांगो फीवर के संदिग्ध मरीजों को मथुरादास माथुर अस्पताल रैफर करना चाहता है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उनके पास स्टाफ की शॉर्टेज है। एम्स बड़ा संस्थान है, वह अपने स्तर पर ही मरीज देख ले। फिलहाल सीसीएचएफ का संदिग्ध रोगी शनिवार को एम्स से डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज संबद्ध मथुरादास माथुर अस्पताल के लिए रैफर नहीं हुआ।
फिलहाल शहर में मिले वायरल हैमरेजिक फीवर के रोगियों में नाक, कान व मल से रक्त आना, लीवर, किडनी खराब होने जैसे लक्ष्ण नजर आ रहे हैं। इन्हें भी क्रीमियन कांगो हैमरेजिक फीवर का संदिग्ध माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि एम्स अधीक्षक ने गत शुक्रवार को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भेजे पत्र में संदिग्ध रोगी होने का हवाला देते हुए कहा था कि गत 2 सितंबर को हुई मीटिंग में सीसीएचएफ रोगियों को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज भेजने के दिशा-निर्देश थे। जबकि डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस बात को नकार रहा है। एमडीएमएच अधीक्षक डॉ. महेन्द्रकुमार आसेरी ने बताया कि दोपहर तक उनके पास कोई एम्स से मरीज नहीं आया। रैफर करने की आवश्यकता ही नहीं है। एम्स खुद बड़ा इंस्टीट्यूट है।
कई बीमारियों में शुरुआती लक्ष्ण एक जैसे
वायरल हैमरेजिक फीवर में दो-तीन दिन तक शुरुआती लक्ष्ण एक जैसे होते हैं। कांगो का अलग से पुणे वॉयरलोजिकल लैब में टेस्ट होता है। मरीज की कांटेक्ट हिस्ट्री देख तय किया जाता है कि डेंगू, निपा, कांगो व इबोला में से किस बीमारी के लिए इलाज दिया जाए। इन सभी में तेज बुखार, कमर दर्द व रक्तस्राव होना शुरू हो जाता हैं।
- डॉ. नवीन किशोरिया, सीनियर प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
एक खाली कमरे से आइसोशन वार्ड नहीं बनता, हम स्टैण्डर्ड मेंटेन रखते है
हम मिलकर तो मरीज देख ही रहे हैं। हमारे पास जो सुविधाएं हैं, हम उसको काम में ले रहे हैं। उसके लिए हम कहां मना कर रहे हैं। जो सुविधाएं नहीं हैं, उसके लिए बोल रहे हैं। स्वाइन फ्लू व कांगो सुविधाएं एमडीएम अस्पताल में ही हैं। सारे अस्पताल में सुविधाएं नहीं दी जा सकती। दवाइयां भी वहीं आती हैं। हमारे पास भी पेशेंट आते हैं। जांच से पहले सारे मरीज नहीं भेजते। रिपोर्ट आने के बाद भेजते हैं। आइसोलेशन वार्ड हमारे पास नहीं है। एम्स अपना स्टैण्डर्ड मेंटेन करके चलता है। ताकि दूसरे में संक्रमण न जाए। हमारी फिलोसॉपी ये रहती है कि बेस्ट ट्रीटमेंट मरीज को उपलब्ध करवाएं। एक खाली कमरे से आइसोलेशन वार्ड नहीं बनता। खानापूर्ति करने के लिए आइसोलेसन बना देना ठीक नहींं है।
- डॉ. अरविंद सिन्हा, अधीक्षक, जोधपुर एम्स
आए दिन एम्स से आ रहे मरीज
उनके पास एम्स अधीक्षक का पत्र आया है। जबकि एम्स में हमें मरीज रैफर करने चाहिए। पिछली बार भी स्वाइन फ्लू मरीज हमारे पास भेजे गए थे। वे मीटिंग बुलाएंगे और चर्चा कर मिलजुल कर इलाज करेंगे। एम्स से आए दिन हमारे पास मरीज भेजे जा रहे है। हम काम करने से मना नहीं करते, लेकिन हमारे पास भी मरीज भार के मुकाबले स्टाफ कम है।
- डॉ. एसएस राठौड, प्रिंसिपल, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
एक खाली कमरे से आइसोशन वार्ड नहीं बनता, हम स्टैण्डर्ड मेंटेन रखते है
हम मिलकर तो मरीज देख ही रहे हैं। हमारे पास जो सुविधाएं हैं, हम उसको काम में ले रहे हैं। उसके लिए हम कहां मना कर रहे हैं। जो सुविधाएं नहीं हैं, उसके लिए बोल रहे हैं। स्वाइन फ्लू व कांगो सुविधाएं एमडीएम अस्पताल में ही हैं। सारे अस्पताल में सुविधाएं नहीं दी जा सकती। दवाइयां भी वहीं आती हैं। हमारे पास भी पेशेंट आते हैं। जांच से पहले सारे मरीज नहीं भेजते। रिपोर्ट आने के बाद भेजते हैं। आइसोलेशन वार्ड हमारे पास नहीं है। एम्स अपना स्टैण्डर्ड मेंटेन करके चलता है। ताकि दूसरे में संक्रमण न जाए। हमारी फिलोसॉपी ये रहती है कि बेस्ट ट्रीटमेंट मरीज को उपलब्ध करवाएं। एक खाली कमरे से आइसोलेशन वार्ड नहीं बनता। खानापूर्ति करने के लिए आइसोलेसन बना देना ठीक नहींं है।
- डॉ. अरविंद सिन्हा, अधीक्षक, जोधपुर एम्स
टीम ने संक्रामक रोग संस्थान का लिया जायजा
नेशनल सेंटर फॉर डिजीट कंट्रोल नई दिल्ली की टीम ने शनिवार को महात्मा गांधी अस्पताल संलग्न चिकित्सालय केएन टीबी एंड चेस्ट हॉस्टिपल स्थित संक्रामक रोग संस्थान का जायजा लिया। टीम ने कई दिशा-निर्देश भी दिए। उल्लेखनीय है कि डॉ. एसएन मेडिकल संक्रामक रोग संस्थान को जल्द संक्रमण संबंधित बीमारियों के लिए डवलप करने जा रहा है।
Published on:
08 Sept 2019 03:31 pm

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