Food Sample Testing : जोधपुर के फैल सैम्पल मैसूर व पुणे लैब में हो रहे हैं पास

Kanharam Mundiyar | Publish: Sep, 08 2018 01:51:24 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

-खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई को लग रहा है झटका

-बड़ा सवाल : कौनसी लैब सही, क्या गलत रिपोर्ट दे रही हमारी लैब

-जो सैम्पल जोधपुर की खाद्य सुरक्षा मानक क्षेत्रीय प्रयोगशाला में फैल हुए, फूड विक्रेता ने उच्च अपील कर जांच अन्य लैब से कराई तो सैम्पल हो गए पास

के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
खाद्य सामग्री में मिलावट की प्रवृति पर अंकुश लगाकर लोगोंं की सेहत से खिलवाड़ रोकने में जुटे स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग की सैम्पल कार्रवाई को झटका लग रहा है। जो सैम्पल जोधपुर स्थित खाद्य सुरक्षा मानक प्रयोगशाला में फैल होते हैं। उनमें से कुछ सैम्पल दूसरे प्रांतों की प्रयोगशाला में पास हो जाते हैं। ऐसे में न केवल सैम्पल लेने वाले खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सैम्पल कार्रवाई बल्कि प्रयोगशाला की जांच पर सवाल खड़ा हो रहा है।


जानकारी के अनुसार देश की सभी प्रयोगशालाओं में एफएसएसआई के एक्ट के तहत समान रूप से खाद्य सामग्री के सैम्पलों की जांच की जाती है। एक समान एक्ट से जांच करने बावजूद प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट अलग कैसे आ रही है। बीते पांच साल में जोधपुर स्थित खाद्य सुरक्षा मानक प्रयोगशाला में सैम्पलों की जांच में से कई सैम्पलों की मैसूर व पुणे की प्रयोगशाला मेंं दुबारा जांच हुई तो उनमें से अधिकत्तर सैम्पलों की रिपोर्ट में अंतर आ गया। जोधपुर की लैब में फैल हुए सैम्पल दूसरी लैबों में पास हो गए।


अन्य लैब से जांच का यह नियम
एक्ट के अनुसार विभाग की ओर से लिए गए सैम्पल की जांच के बाद फूड विक्रेता उच्च अपील के रूप में निर्धारित शुल्क जमा करवाकर अन्य लैब से करा सकता है। कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम खाद्य सामग्री के एक आर्टिकल के चार सैम्पल लेती है। जब विक्रेता अपील के बाद निर्धारित शुल्क जमा करवा कर अन्य लैब से जांच की मांग करता है तो दूसरे सैम्पल बाहर की लैब को भेजे जाते हैं।


खाद्य सामग्री के फैल सैम्पल व जांच : एक नजर
-वर्ष 2014 मेंं विभाग की टीम ने 162 सैम्पल लिए। जिसमें से जोधपुर की लैब की जांच में 32 सैम्पल फैल हुए। एक विक्रेता ने बाहर की लैब में दुबारा जांच एक सैम्पल पास हो गया।

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-वर्ष 2015 में विभाग की टीम ने 302 सैम्पल लिए। जोधपुर लैब में 84 सैम्पल फैल हुए। अन्य लैब में दुबारा जांच करवाई तो एक सैम्पल पास हो गया।

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-वर्ष 2016 में विभाग की टीम ने 374 सैम्पल लिए। जोधपुर लैब में 108 सैम्पल फैल हुए। अन्य लैब में दुबारा जांच करवाई तो 9 सैम्पल पास हो गए।

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-वर्ष 2017 में विभाग की टीम ने 334 सैम्पल लिए। जोधपुर लैब में 126 सैम्पल फैल हुए। अन्य लैब में दुबारा जांच करवाई तो 22 सैम्पल पास हो गए।


इनका कहना है-
मैसूर व पुणे की लैब में सूक्ष्मता से जांच होती है, इसलिए वहां की रिपोर्ट में फर्क आ जाता है। वहां की जांच में सैम्पल पास ही नहीं बल्कि कई बार हमारी सब स्टैण्डर्ड रिपोर्ट भी अनसेफ केटेगिरी में भी आ जाती है।


-डॉ. सुनील बिस्ट, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जोधपुर

 

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