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RGHS: मरीजों की फ्री दवाइयां, सहकारी भण्डारों का दिवाला

- RGHS योजना के डेढ़ साल में 486 करोड़ की दवाइयां बेची, अब भी 186 करोड़ का भुगतान अटका - प्रदेश में होलसेल मेडिकल सप्लायर्स ने भण्डारों में सप्लाई रोकी, सहकारी भण्डार के दवा काउंटर बंद होने के कगार पर

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RGHS: मरीजों की फ्री दवाइयां, सहकारी भण्डारों का दिवाला

RGHS: मरीजों की फ्री दवाइयां, सहकारी भण्डारों का दिवाला

जोधपुर. सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए नवम्बर 2021 में राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के कारण सहकारिता विभाग के सहकारी भण्डार/मेडिकल स्टोर डूबने के कगार पर आ गए हैं। प्रदेश के समस्त जिलों के सहकारी मेडिकल स्टोर के सरकार में 186 करोड़ रुपए बकाया है। होलसेल मेडिकल सप्लायर्स को भुगतान नहीं मिलने से अब उन्होंने भण्डार में दवा आपूर्ति बंद कर दी है। इससे जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर सहित अन्य जिलों के कई मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। हालांकि सरकारी कर्मचारी व पेंशनर्स को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा क्योंकि वे अब निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले रहे हैं।

कानफेड ने लिखा बंद हो रही दवाइयों की दुकानें
राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ जयपुर (कानफेड) ने प्रदेश के समस्त सहकारी भंडार के मेडिकल स्टोर की ओर से 5 जुलाई को सरकार को पत्र लिखकर खराब वित्तीय स्थिति से अवगत कराया है। कानफेड ने बताया कि दवा वितरकों को समय पर भुगतान नहीं होने से दवा आपूर्ति कई जगह चरमरा गई है। इससे मेडिकल स्टोर पर दवाइयों की कमी हो गई है। भुगतान में देरी होने से सहकारी समितियों/सहकारी भंडार के दवा विक्रय केंद्रों को बंद करने की स्थिति आ रही है।

468 करोड़ की दवाइयां बेची

आरजीएचएस योजना लागू होने के बाद प्रदेश के सहकारी मेडिकल स्टोर ने अब तक 486 करोड़ रुपए से अधिक की दवाइयां बेची लेकिन अब तक 312 करोड रुपए ही पुनर्भरण राशि प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा भी अन्य मद के 11.59 करोड रुपए बकाया है।

निजी मेडिकल स्टोर को पूरा भुगतान

सरकार आरजीएचएस योजना के दायरे में आने वाले निजी मेडिकल स्टोर को समय पर भुगतान कर रही है। इससे निजी मेडिकल स्टोर फल फूल रहे हैं। निजी मेडिकल स्टोर जेेनेरिक दवाइयां एमआरपी से 40 फीसदी और ब्रांडेड दवाइयां 12 फीसदी सस्ती दे रहे हैं।

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मार्जिन को लेकर मामला अटक रहा है। हम लोग 15 फीसदी मार्जिन मांग रहे हैं और सरकार 10 प्रतिशत ही देना चाह रही है। सरकार से बातचीत चल रही है।

अनिल कुमार, महाप्रबंधक, कानफेड जयपुर