
कार्यक्रम में मौजूद लोग। फोटो- पत्रिका
जोधपुर। माहेश्वरी महाकुंभ केवल आयोजन नहीं, बल्कि प्रवासी माहेश्वरी समाज के लिए मातृभूमि से आत्मीय संवाद का अवसर भी बना। 25 देशों से आए प्रवासी राजस्थानी समाजबंधुओं में से कुछ प्रमुख एनआरआई से राजस्थान पत्रिका ने विशेष बातचीत की। बातचीत में उनकी जड़ों से जुड़ाव, सेवा, संस्कार और वैश्विक अनुभवों की झलक दिखाई दी। जोधपुर में आयोजित माहेश्वरी महाकुंभ ने इसी वैश्विक भावबोध को एक मंच पर साकार भी किया है।
इंडोनेशिया माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वयक रविंद्र कुमार मोना ने बताया कि वे मूलतः जैसलमेर के हैं। तीन पीढ़ी पहले उनका परिवार जकार्ता बस गया, लेकिन जैसलमेर से रिश्ता कभी नहीं टूटा। आज भी उनकी पुश्तैनी हवेली जैसलमेर में है और कुलदेवी बिजू माता के दर्शन के लिए वे भारत आते रहते हैं। उनकी पत्नी ज्योत्स्ना मोना ने कहा कि जहां भी समाज और मातृभूमि को हमारी आवश्यकता होती है, हम पूरी निष्ठा से सहयोग करते हैं।
नागौर जिले के बोरावड़-मकराना मूल निवासी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रकाश हेड़ा केन्या के नैरोबी शहर में पिछले 44 वर्षों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेवा कार्य उनके जीवन का मूल मंत्र है। नागौर जिला छूटने के बाद महाराष्ट्र के अकोला के पास एक छोटे से गांव में उनका बचपन बीता, जहां उन्होंने माहेश्वरी भवन निर्माण कराया। इसके अलावा महाराष्ट्र के वाशिम शहर में पिता की स्मृति में हेल्थ क्लब का नियमित संचालन और माहेश्वरी समाज द्वारा संचालित सेवा प्रकल्प व परियोजनाओं में उनका सतत योगदान है। उनकी पत्नी भी चिकित्सक हैं और मानवीय सेवा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
ब्यावर मूल निवासी सीए पंकज मूंदड़ा पिछले 21 वर्षों से दुबई में निवासरत हैं। वे दुबई में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संगठन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने ‘360टीएफ’ नामक ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से भारतीय निर्यातकों को अमेरिका, यूएई, यूके, यूरोप और अफ्रीका सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुरक्षित भुगतान के साथ व्यापार करने में सुविधा मिलती है। इस नवाचार के लिए उन्होंने जयपुर में कार्यालय भी स्थापित किया है। उनका कहना है कि तकनीक के जरिए भारत को वैश्विक मंच पर सशक्त बनाना उनका लक्ष्य है।
पाली मूल निवासी सीए राजेश सोमानी पिछले 32 वर्षों से दुबई में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि पाली में एकल विद्यालय, सेवा संस्था संचालन और वृद्धाश्रम सहयोग के माध्यम से वे समाज के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं। उनका कहना था कि दूर रहकर भी अपनी मिट्टी के लिए कुछ करना ही हमारी पहचान है। उनका मानना है कि भौगोलिक दूरी भले ही हो, लेकिन संस्कार हों तो सेवा और मातृभूमि से जुड़ाव कभी कम नहीं होता।
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नेपाल माहेश्वरी परिषद के संगठन मंत्री राजेश लखोटिया ने बताया कि उनका परिवार करीब 85 वर्ष पहले व्यापार के सिलसिले में नेपाल गया, लेकिन नागौर और पश्चिमी राजस्थान से उनका भावनात्मक जुड़ाव लगातार बना रहा। नेपाल में परिषद से जुड़े नौ संगठनों के सदस्यों ने मिलकर धर्मशाला का निर्माण कराया है, जिसमें नागौर, जोधपुर और नोखा मूल के समाजबंधुओं की सहभागिता रही।
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Updated on:
11 Jan 2026 02:40 pm
Published on:
11 Jan 2026 02:39 pm
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