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‘बंधी का सिस्टम ऊपर से है, नहीं देने पर हटा दिए जाओगे’, सहकारी भंडार का जीएम एेसे एेंठता था रुपए

5.5 लाख लेने वाला सहकारी भंडार का जीएम धमकाता था फार्मासिस्टों को, राशन दुकान की बजाय डीएसओ व निरीक्षक के बताए ठिकानों पर होती गेहूं की सप्लाई

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भोपाल

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Nidhi Mishra

Apr 24, 2017

accused Madhusudan Sharma

accused Madhusudan Sharma

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से राशन की दुकानों पर सप्लाई के लिए निकलने वाले गेहूं की भी कालाबाजारी की जा रही है। निगम से राशन दुकानों की बजाय हर माह हजारों क्विंटल गेहूं डीएसओ व निरीक्षकों के बताए ठिकानों पर पहुंचे रहे हैं। साढ़े पांच लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार होने वाले जोधपुर उपभोक्ता होलसेल भण्डार लिमिटेड के महाप्रबंधक मधुसूदन शर्मा ने रिमाण्ड के दौरान पूछताछ में यह खुलासा किया है। इसके बाद अब रसद विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

ब्यूरो के उपधीक्षक जगदीश सोनी ने बताया कि जिला रसद विभाग से सहकारी भण्डार को वर्ष 2015 में गेहूं परिवहन का ठेका मिला था। 23.5 रुपए प्रति क्विंटल की दर से एफसीआई से राशन दुकान तक गेहूं का परिवहन तय किया गया था। उपभोक्ता भंडार के सुरेश उपाध्याय को यह ठेका दिया गया था। हर महीने 15 हजार क्विंटल परिवहन किया जाता था। यानि हर महीने 3.45 लाख रुपए का बिल बनता था। इसके बदले जीएम को 60 हजार रुपए बंधी मिलती थी। वर्ष 2016 में ठेका नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद सहकारी भण्डार के मार्फत गेहूं का परिवहन किया गया था।

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इस संबंध में एफसीआई से गेहूं परिवहन का कार्य देखने वाले सहकारी भण्डार के शिव नारायण व पूरणमल बंजारा से पूछताछ की गई। शुरुआत में नकारने के बाद दोनों ने जीएम को 50-50 हजार रुपए की दो बंधी देना कबूल किया।

राशन की दुकान पर नहीं पहुंचता गेहूं

ब्यूरो के उपाधीक्षक सोनी ने बताया कि शहर में राशन की 265 दुकानें हैं। खाद्य निगम से हर माह 15 हजार क्विंटल गेहूं सप्लाई के लिए निकलता है। परिवहन कार्य देखने वाले शिवनारायण पंवार व पूरणमल बंजारा ने ब्यूरो को बताया कि गेहूं का परिवहन डीएसओ व निरीक्षकों के बताए स्थान पर होता था। अधिकांश राशन दुकानों पर गेहूं पहुंचता ही नहीं था।

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छह फार्मासिस्ट ने स्वीकारा, जीएम को देते थे बंधी

होलसेल भण्डार लिमिटेड के जीएम मधुसूदन शर्मा को मासिक बंधी देने वाले छह फार्मासिस्टों को एसीबी ने नोटिस देकर रविवार को तलब किया। फार्मासिस्ट रामचन्द्र जाजूंड व सोहन सिंह ने बीस-बीस हजार रुपए मासिक, मनोज जोशी ने दस हजार रुपए, मेघाराम ने पांच हजार, गायड़ सिंह ने 8 व रतन सिंह ने 3 हजार रुपए मासिक जीएम को देना स्वीकार किया।

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धमकी : ऊपर से सिस्टम है, नहीं देने पर हटा देंगे

एसीबी की पूछताछ में फार्मासिस्टों ने बताया कि जीएम उन्हें मासिक बंधी के लिए धमकाता था। उसका कहना था कि बंधी देना ऊपर से बना सिस्टम है। यदि बंधी नहीं दोगे तो हटा दिए जाओगे। सिस्टम में बने रहने के लिए बंधी देनी ही होगी।

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