
हाईकोर्ट ने पूछा समस्या का इलाज, प्रशासन ने कहा मामले ज्यादा, स्टाफ कम
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने सोमवार को हाईकोर्ट प्रशासन (High court administration) से पूछ लिया कि फाइलें गायब होने की समस्या का क्या इलाज है? इस पर हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से बताया गया कि जोधपुर व जयपुर पीठ में लंबित मामलों की संख्या के मुकाबले स्टाफ बेहद कम है। इससे फाइल मैनेजमेंट प्रभावित हो रहा है।
खंडपीठ ने हाईकोर्ट प्रशासन को कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार के सुझाव देने के निर्देश के साथ अगली सुनवाई 23 सितंबर को मुकर्रर की है।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश अशोककुमार गौड़ की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता रामरख व्यास की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा सुप्रीम कोर्ट फाइलें गायब होने की समस्या पर गंभीर रुख अपना चुका है।
उन्होंने हाईकोर्ट की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य से पूछा कि फाइलों की ट्रेकिंग और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, इस पर गंभीरता से कार्य करने की जरूरत है।
डॉ.आचार्य ने कहा कि फाइलों की ट्रेकिंग को क्यूआर कोड व्यवस्था लागू कर मॉनिटर किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने समन्वित सुझाव देने के निर्देश दिए।
आचार्य ने जोधपुर व जयपुर पीठ में लंबित मामलों की संख्या की तुलना में स्टॉफ की कमी का जिक्र करते हुए बताया कि जोधपुर पीठ में 1 लाख,72 हजा,720 और जयपुर पीठ में 1 लाख,75 हजार मामले लंबित हैं। इन पत्रावलियों के संधारण के लिए वर्तमान में कार्यरत स्टाफ की तुलना में कई गुना ज्यादा स्टाफ की जरूरत है।
ऐसे हैं हालात
जोधपुर हाईकोर्ट में सिविल, क्रिमिनल तथा रिट प्रकरणों के लिए 83 का स्टाफ नियुक्त है, जबकि 263 कार्मिकों की जरूरत है।
इसी तरह जयपुर पीठ में 138 कार्मिक कार्यरत हैं और 153 कार्मिकों की और जरूरत है। पेशी अनुभाग में जोधपुर में 22 तथा जयपुर में 23 कार्मिक कार्यरत हैं, जबकि दोनों जगह क्रमश: 37 और 41 कार्मिकों की आवश्यकता है। वाद सूची, कॉपिंग, सीएफएस तथा पेपर बुक अनुभाग में जोधपुर में 66 तथा जयपुर में 115 कार्मिक हैं। दोनों जगह क्रमश: 91 तथा 86 कार्मिकों की दरकार है।
Published on:
02 Sept 2019 09:12 pm
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