
टिड्डी के मामले में भारत से मुंह की खाई चीन ने, जानिए कैसे?
जोधपुर. ईरान ने चीन द्वारा टिड्डी मारने के लिए दिए गए पेस्टीसाइड का ऑफर आखिरकार ठुकरा कर चीन के भारत को अलग-थलग करने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। चीन को मना करने के बाद भारत ने ईरान को 25 हजार लीटर पेस्टीसाइड भेजा जो बुधवार को ईरान पहुंच गया। मुंबई स्थित पेस्टीसाइड बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी कम्पनी हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड लिमिटेड (एचआईएल) ने 95 फीसदी मैलाथियान का कंसाइनमेंट भेजा।
ईरान में अल्ट्रा लॉ वोल्यूम (यूएलवी) पेस्टीसाइड नहीं है। इस साल ईरान में भयंकर टिड्डी प्रजनन होने के कारण वहां अकाल की आशंका है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका को अपनी तरफ करने के बाद चीन ने इसका फायदा उठाते हुए भारत के मजबूत इस्लामिक दोस्त ईरान को चोरी-छिपे यूएलवी पेस्टीसाइड का ऑफर दिया। पिछले महीने भारतीय खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक लगने के बाद उन्होंने भारत के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के बैनर तले होने वाली चार देशों भारत, पाक, ईरान व अफगानिस्तान की दक्षिण पश्चिमी एशिया सबमिट में भारत ने यह बात ईरान से पूछी तो ईरान ने चीन के ऑफर के बारे में बताया। इसके बाद विदेश मंत्रालय स्तर की बैठक करके ईरान को भारत से पेस्टीसाइड भेजने पर सहमति बनी।
चीन ने पाक को दिया नया पेस्टीसाइड
पाकिस्तान भी यूएवी पेस्टीसाइड नहीं बनाता है। चीन ने पाकिस्तान को पेस्टीसाइड भेजा जो नए प्रकार के रासायनिक पदार्थ से बना है। पेस्टीसाइड के साथ टिड्डी पर स्प्रे के लिए माइक्रोनियर व बॉयलर भी भेजे गए।
पाक, श्रीलंका व नेपाल पर जमा चुका है प्रभुत्व
लम्बे अरसे से चीन अपने साम्राज्यवादी मंसूबों के कारण भारत को उसके पड़ौसी देशों से अलग-थलग कर रहा है। पाकिस्तान में सिल्क रोड का निर्माण व ग्वादर बंदरगाह बनाकर पहले ही वहां घुसपैठ कर चुका है। श्रीलंका में हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लीज पर ले लिया। नेपाल को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति कर वहां भारतीय तेल कम्पनियों के एकाधिकार को छीन लिया। हाल ही में नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली ने बॉर्डर विवाद पर चीन का पक्ष लिया था और अपनी संसद में भारत के कुछ क्षेत्रों को दिखाते हुए नया नक्शा पास कराया।
ईरान क्यों है महत्वपूर्ण
चीन के पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह की काट के लिए भारत ने ईरान में चाहबहार बंदरगाह बनाया है जो अफ्रीका तक पहुंच सुनिश्चित करता है। सऊदी अरब के बाद भारत का सर्वाधिक तेल आयात ईरान से होता है और तो और ईरान भारतीय मुद्रा में भी भुगतान स्वीकार कर लेता है। ईरान भारत का रणनीतिक साझीदार भी है।
Published on:
17 Jun 2020 10:00 pm

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